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Fraud / होटल मैनेजमेंट डिग्री के नाम पर 3.50 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी, निजी संस्थान के संचालकों पर एफआईआर दर्ज

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 6 Hours Ago • 1 Min Read

Fraud : शिमला में होटल मैनेजमेंट डिग्री दिलाने के नाम पर कथित धोखाधड़ी के मामले में अदालत के निर्देश के बाद पुलिस ने निजी संस्थान के संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि करीब 3.50 लाख रुपये शुल्क लेने के बावजूद कोर्स पूरा होने के कई वर्ष बाद भी डिग्री और अन्य मूल दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।

शिमला

अदालत के आदेश पर दर्ज हुई एफआईआर

शिमला के थाना ढली में एक निजी होटल मैनेजमेंट संस्थान के चेयरमैन, समन्वयक और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ अदालत के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने मामला आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी तथा अन्य संबंधित धाराओं के तहत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामला होटल मैनेजमेंट डिग्री उपलब्ध कराने के नाम पर कथित वित्तीय अनियमितता से जुड़ा है। पुलिस अब उपलब्ध दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच कर रही है।

2017 में लिया दाखिला, करीब 3.50 लाख रुपये जमा करने का आरोप

शिकायतकर्ता प्रियव्रत मौदगिल के अनुसार उन्होंने वर्ष 2017 में वरिष्ठ माध्यमिक परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद संजौली स्थित निजी संस्थान में बीएससी होटल मैनेजमेंट एंड कैटरिंग साइंस कोर्स में प्रवेश लिया। आरोप है कि संस्थान की ओर से कोर्स को यूजीसी से मान्यता प्राप्त होने की जानकारी दी गई। शिकायत के अनुसार तीन वर्षीय कोर्स की फीस 1.74 लाख रुपये बताई गई, जबकि परीक्षा शुल्क, डिप्लोमा शुल्क और अन्य मदों सहित परिवार से लगभग 3.50 लाख रुपये लिए गए। इसमें 2.94 लाख रुपये का शिक्षा ऋण भारतीय स्टेट बैंक से लेकर संस्थान के खाते में जमा कराया गया, जबकि शेष राशि नकद जमा कराई गई।

कोर्स पूरा होने के बाद भी डिग्री नहीं मिलने का आरोप

शिकायतकर्ता का कहना है कि वर्ष 2020 में कोर्स पूरा करने के बाद भी उन्हें मूल डिग्री, डिप्लोमा और अंतिम अंकतालिका उपलब्ध नहीं कराई गई। आरोप है कि संस्थान की ओर से केवल तमिलनाडु स्थित एक विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय की अस्थायी अंकतालिका दी गई। इसके बाद कई बार संस्थान प्रबंधन से संपर्क किया गया, लेकिन डिग्री जारी करने का आश्वासन ही मिलता रहा। शिकायत के अनुसार लगभग छह वर्ष बीत जाने के बाद भी शैक्षणिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।

अन्य विद्यार्थियों से जुड़े मामलों की भी जांच

शिकायतकर्ता के अनुसार वर्ष 2023 में जब वह संजौली स्थित संस्थान परिसर पहुंचे तो वहां का कार्यालय बंद मिला और बाद में कार्यालय के भट्ठाकुफर स्थानांतरित होने की जानकारी मिली। वहां भी डिग्री जारी करने का आश्वासन दिया गया, लेकिन दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि अन्य बैचों के कई छात्र भी इसी प्रकार प्रभावित हो सकते हैं। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या इसी प्रकार की शिकायतें अन्य विद्यार्थियों से भी जुड़ी हैं। स्थानीय अदालत द्वारा सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए जाने के बाद पुलिस ने मामले की औपचारिक जांच शुरू कर दी है।

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