हिमाचल के CBSE सरकारी स्कूल पांच वर्षों में होंगे अग्रणी संस्थान, 24 हजार से अधिक बढ़ा नामांकन: मुख्यमंत्री
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए लगातार सुधार कर रही है। उन्होंने बताया कि सीबीएसई से संबद्ध सरकारी विद्यालयों में 24 हजार से अधिक विद्यार्थियों का नामांकन बढ़ा है और आगामी वर्षों में इन्हें राज्य के अग्रणी शिक्षण संस्थानों के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
शिमला
बीसीएस स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शिमला स्थित बिशप कॉटन स्कूल (बीसीएस) के स्थापना दिवस समारोह की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण और समान शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि इसी नीति के तहत सरकारी विद्यालयों में पहली कक्षा से अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा शुरू की गई है तथा अब तक प्रदेश के 156 सरकारी विद्यालयों को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से संबद्ध किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सुधारों का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है और सरकारी विद्यालयों में 24 हजार से अधिक विद्यार्थियों का नया नामांकन दर्ज हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य आगामी पांच वर्षों में सीबीएसई से संबद्ध सरकारी विद्यालयों को प्रदेश के अग्रणी शिक्षण संस्थानों के रूप में विकसित करना है, ताकि विद्यार्थियों को निजी विद्यालयों के समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक सुविधाएं और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा किसी भी प्रगतिशील समाज की आधारशिला होती है और इसी सोच के साथ राज्य सरकार शिक्षा क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुधार लागू किए गए हैं। उनके अनुसार ASER रिपोर्ट में हिमाचल प्रदेश के विद्यार्थियों ने पढ़ने की क्षमता के मामले में देश में बेहतर प्रदर्शन किया है। इसके अलावा परख (PARAKH) मूल्यांकन में प्रदेश ने वर्ष 2021 के 21वें स्थान से उल्लेखनीय सुधार करते हुए शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्यों में स्थान बनाया है। वहीं शिक्षा मंत्रालय के परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) में भी हिमाचल सात स्थान की प्रगति के साथ राष्ट्रीय स्तर पर छठे स्थान पर पहुंचा है। उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां इस बात का संकेत हैं कि सरकार केवल शिक्षा की पहुंच बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था विकसित करने पर भी समान रूप से ध्यान दे रही है।
मूल्य आधारित शिक्षा और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में सफलता प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में अनुशासन, ईमानदारी, नेतृत्व क्षमता, सेवा भावना और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे मूल्यों का विकास करना भी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तकनीकी विकास के साथ नैतिक मूल्यों का महत्व और बढ़ गया है। विद्यार्थियों को ऐसे नागरिक बनने का प्रयास करना चाहिए जो समाज, प्रदेश और देश के विकास में सक्रिय योगदान दें। उन्होंने यह भी कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रत्येक बच्चे का अधिकार है और राज्य सरकार इसी दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने प्रदेश के 99.30 प्रतिशत साक्षरता दर के साथ पूर्ण साक्षर राज्य बनने का उल्लेख करते हुए इसे शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
माउंटेनियरिंग अभियान को दिखाई हरी झंडी
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विद्यालय के संस्थापक बिशप जॉर्ज एडवर्ड लिंच कॉटन की स्मृति में बने स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की तथा विद्यालय का ध्वज फहराया। उन्होंने विद्यालय के माउंटेनियरिंग अभियान-2026 को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह अभियान 28 जुलाई से 8 अगस्त तक लेह-लद्दाख स्थित माउंट यालुंग नोंग (6,090 मीटर) तक आयोजित किया जाएगा। अभियान में विद्यालय के विद्यार्थी अमोद तलवलकर, लालदिनजुआला, अल्तमाश नोमानी, तेनजिन त्सेवांग, मनराज सिंह ग्रोवर और अमन अग्रवाल भाग ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास, टीम भावना और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कार्य करने की क्षमता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।