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हिमाचल में आपदा प्रबंधन और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने पर सरकार का विशेष फोकस

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन2 • 1 Hour Ago • 1 Min Read

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने रेडी-एचपी परियोजना की समीक्षा बैठक में आपदा प्रबंधन क्षमता को मजबूत करने और आधारभूत ढांचे के पुनर्विकास पर जोर दिया। सरकार ने प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों में राहत, पुनर्वास और आजीविका संरक्षण के लिए दीर्घकालिक व्यवस्था विकसित करने की बात कही है।

शिमला

रेडी-एचपी परियोजना की प्रगति और क्रियान्वयन की समीक्षा

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को रेज़िलिएंट एक्शन फॉर डेवलपमेंट एंड डिजास्टर रिकवरी हिमाचल प्रदेश (रेडी-एचपी) परियोजना की प्रगति एवं क्रियान्वयन को लेकर आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में परियोजना के विभिन्न चरणों, क्रियान्वयन की गति तथा भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2687 करोड़ रुपये की लागत से संचालित यह परियोजना प्रदेश में आपदा प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करने और प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने अधिकारियों को परियोजना से जुड़े कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश भी दिए।

प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान का विस्तृत उल्लेख

मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान वर्ष 2023 से 2025 के बीच प्रदेश में हुई प्राकृतिक आपदाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अवधि में बादल फटने की 86, भूस्खलन की 234 और बाढ़ की 121 घटनाएं दर्ज की गईं। इन घटनाओं के कारण हिमाचल प्रदेश को 12,500 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश संवेदनशील हिमालयी भू-वैज्ञानिक क्षेत्र में स्थित है, जिसके चलते यहां प्राकृतिक आपदाओं का खतरा लगातार बना रहता है। ऐसी परिस्थितियों में मजबूत और दीर्घकालिक आपदा प्रबंधन व्यवस्था तैयार करना समय की आवश्यकता है।

सड़क, बिजली और जलापूर्ति ढांचे के पुनर्विकास पर विशेष ध्यान

मुख्यमंत्री ने कहा कि रेडी-एचपी परियोजना के तहत आपदा प्रभावित आधारभूत ढांचे की पुनर्स्थापना पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसमें सड़कों, जलापूर्ति योजनाओं, बिजली आपूर्ति नेटवर्क और आजीविका से जुड़ी परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि परियोजना का उद्देश्य केवल क्षति की भरपाई करना नहीं, बल्कि भविष्य में आपदाओं के दौरान कम नुकसान सुनिश्चित करने के लिए टिकाऊ और सुरक्षित ढांचा तैयार करना भी है। इसके साथ ही आपदा के बाद राहत और पुनर्वास के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करने पर भी कार्य किया जाएगा, ताकि प्रभावित लोगों को शीघ्र सहायता उपलब्ध करवाई जा सके।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आजीविका संरक्षण पर भी रहेगा फोकस

बैठक में किसानों, बागवानों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आजीविका सुरक्षा पर भी विशेष चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सबसे अधिक प्रभाव ग्रामीण क्षेत्रों और कृषि-बागवानी गतिविधियों पर पड़ता है। इसलिए ऐसे ढांचे और सुविधाएं विकसित की जानी चाहिए, जिससे किसानों और बागवानों की फसल तथा आय सुरक्षित रह सके। उन्होंने कहा कि ग्रीन पंचायत जैसी योजनाओं के माध्यम से रोजगार के अवसर बढ़ाने और सामाजिक सुरक्षा तथा बीमा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी सरकार कार्य कर रही है।

वरिष्ठ अधिकारियों ने भी दिए सुझाव

बैठक में मुख्य सचिव संजय गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्व के.के. पंत, प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार, सलाहकार योजना वीरेन्द्र कुमार, निदेशक ऊर्जा राकेश कुमार प्रजापति, निदेशक ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज राज राघव शर्मा और उप-परियोजना निदेशक सुरेन्द्र मालटू सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने परियोजना के विभिन्न पहलुओं पर सुझाव प्रस्तुत किए और आगामी चरणों की कार्ययोजना पर चर्चा की।