एचपीयू धर्मशाला में महिला रोजगार और वित्त आयोग विषयों पर विशेष व्याख्यान आयोजित
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय क्षेत्रीय केंद्र धर्मशाला के अर्थशास्त्र विभाग में महिला रोजगार और 16वें वित्त आयोग से जुड़े विषयों पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सहायक आचार्य डॉ. कमल सिंह ने वित्तीय संघवाद, राजस्व वितरण और महिला रोजगार से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर जानकारी साझा की।
धर्मशाला
अर्थशास्त्र विभाग द्वारा आयोजित किया गया विशेष व्याख्यान
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय क्षेत्रीय केंद्र धर्मशाला के अर्थशास्त्र विभाग द्वारा मंगलवार को क्षेत्रीय केंद्र के सभागार में विशेष व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय देहरा कैंपस के अर्थशास्त्र विभाग के सहायक आचार्य डॉ. कमल सिंह मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने “भारत में महिला रोजगार : पीएलएफएस (2017-2024) से साक्ष्य” तथा “16वां वित्त आयोग : प्रमुख मुद्दे, चुनौतियां और 15वें वित्त आयोग से निरंतरताएँ” विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
वित्त आयोग की भूमिका और राजकोषीय संतुलन पर चर्चा
अपने व्याख्यान के दौरान डॉ. कमल सिंह ने कहा कि वित्त आयोग भारतीय संविधान के अनुच्छेद 280 के अंतर्गत गठित एक संवैधानिक निकाय है, जिसका गठन राष्ट्रपति द्वारा प्रत्येक पांच वर्ष में किया जाता है। उन्होंने बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच कर राजस्व के वितरण को संतुलित करना तथा राजकोषीय व्यवस्था को मजबूत बनाना है। उन्होंने कहा कि वित्त आयोग देशभर में संसाधनों के संतुलित वितरण और समावेशी विकास को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
16वें वित्त आयोग की सिफारिशों पर भी रखे विचार
डॉ. कमल सिंह ने कहा कि 16वें वित्त आयोग (2026-31) के तहत राजकोषीय संघवाद से जुड़े कई महत्वपूर्ण बदलावों की सिफारिश की गई है। उन्होंने बताया कि विभिन्न राज्यों को दिए जाने वाले राजस्व घाटा अनुदान को समाप्त करने का प्रस्ताव विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके अनुसार इससे उन राज्यों पर वित्तीय दबाव बढ़ सकता है, जो पहले से अधिक ऋण भार और संरचनात्मक राजस्व घाटे से प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि इस स्थिति में राज्यों को अपने वित्तीय संसाधनों को मजबूत करने की दिशा में अतिरिक्त प्रयास करने होंगे।
महिला रोजगार बढ़ाने के लिए योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर
अपने दूसरे व्याख्यान में डॉ. कमल सिंह ने महिला रोजगार के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण के लिए रोजगार के अवसरों का विस्तार आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में महिलाओं की तुलना में पुरुषों में बेरोजगारी दर कम है, इसलिए महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए विभिन्न सरकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं और यदि इन्हें स्थानीय, राज्य और केंद्रीय स्तर पर बेहतर समन्वय के साथ लागू किया जाए तो महिला रोजगार में वृद्धि संभव है।
कार्यक्रम में शिक्षकों और अधिकारियों की रही उपस्थिति
इस अवसर पर क्षेत्रीय केंद्र धर्मशाला के निदेशक प्रो. कुलदीप कुमार अत्री, प्रो. डी.पी. वर्मा, विधि विभाग के प्राचार्य, डॉ. किशोर कुमार, संयोजक अर्थशास्त्र विभाग, डॉ. राम रतन, कंचन बाला तथा हिंदी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. संदीप कुमार धीमान सहित अन्य शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में अर्थशास्त्र विभाग की ओर से मुख्य वक्ता डॉ. कमल सिंह को स्मृति चिन्ह और प्रमाण-पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया।