हिमाचल के 29 सरकारी डिग्री कॉलेजों में शुरू होगा 4 वर्षीय स्नातक कार्यक्रम, शिक्षा विभाग ने जारी की अधिसूचना
हिमाचल प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 से उच्च शिक्षा व्यवस्था में बदलाव करते हुए 29 सरकारी डिग्री कॉलेजों में चार वर्षीय स्नातक डिग्री कार्यक्रम शुरू करने की अधिसूचना जारी की है। इसके साथ ही कम छात्र संख्या वाले 10 सरकारी कॉलेजों का विलय संबंधित जिला मुख्यालय स्थित महाविद्यालयों में किया जाएगा, जबकि 91 कॉलेजों में वर्तमान तीन वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम जारी रहेगा।
शिमला
चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम की शुरुआत
हिमाचल प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के प्रावधानों के अनुरूप राज्य के सरकारी महाविद्यालयों में स्नातक शिक्षा के पुनर्गठन संबंधी अधिसूचना जारी कर दी है। अधिसूचना के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रदेश के 29 सरकारी डिग्री कॉलेजों में चार वर्षीय स्नातक डिग्री कार्यक्रम लागू किया जाएगा। उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को बहुविषयक एवं अनुसंधान आधारित शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना है।
26 कॉलेजों में ऑनर्स एवं ऑनर्स विद रिसर्च
उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार 1,500 से अधिक छात्र नामांकन वाले 26 सरकारी डिग्री कॉलेजों में चार वर्षीय स्नातक डिग्री कार्यक्रम ऑनर्स अथवा ऑनर्स विद रिसर्च के साथ संचालित किया जाएगा। वहीं 1,000 से 1,500 विद्यार्थियों की संख्या वाले तीन सरकारी कॉलेजों में चार वर्षीय ऑनर्स डिग्री कार्यक्रम शुरू होगा। ऑनर्स विद रिसर्च की सुविधा केवल उन्हीं विषयों में उपलब्ध कराई जाएगी, जहां कम से कम दो मान्यता प्राप्त पीएचडी पर्यवेक्षक उपलब्ध होंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कार्यक्रमों का संचालन उपलब्ध शैक्षणिक संसाधनों के आधार पर किया जाएगा।
91 कॉलेजों में जारी रहेगा तीन वर्षीय पाठ्यक्रम
प्रदेश के शेष 91 सरकारी डिग्री कॉलेजों तथा डीएवी कॉलेज कोटखाई में वर्तमान तीन वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम पूर्ववत जारी रहेगा। इसके साथ ही विभिन्न महाविद्यालयों में विषयों के युक्तिकरण की प्रक्रिया भी लागू की जाएगी। सरकार ने वित्तीय संसाधनों के बेहतर उपयोग तथा उपलब्ध छात्र संख्या को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है।
संस्कृत महाविद्यालयों और सहायता प्राप्त कॉलेजों को भी अनुमति
अधिसूचना के तहत सरकारी संस्कृत महाविद्यालय फागली, सुंदरनगर और नाहन में साहित्याचार्य, दर्शनाचार्य, ज्योतिषाचार्य, व्याकरणाचार्य तथा वेदाचार्य विषयों में चार वर्षीय ऑनर्स और ऑनर्स विद रिसर्च कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त चार अनुदान सहायता प्राप्त महाविद्यालयों—सेंट बेड्स कॉलेज शिमला, एमसीएम डीएवी कॉलेज कांगड़ा, एलएमएस कॉलेज सुंदरनगर तथा एसवीएसडी कॉलेज भटोली—को भी चार वर्षीय स्नातक डिग्री कार्यक्रम ऑनर्स अथवा ऑनर्स विद रिसर्च के साथ संचालित करने की अनुमति प्रदान की गई है।
नए पद नहीं होंगे सृजित
सरकार ने अधिसूचना में स्पष्ट किया है कि इन कार्यक्रमों का संचालन वर्तमान स्वीकृत शिक्षण एवं गैर-शिक्षण स्टाफ के माध्यम से ही किया जाएगा। इसके लिए कोई अतिरिक्त पद सृजित नहीं किए जाएंगे और न ही अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। साथ ही इन कार्यक्रमों की निरंतरता संबंधित महाविद्यालयों में न्यूनतम 1,000 विद्यार्थियों के नामांकन पर निर्भर करेगी।
10 कॉलेजों का होगा विलय
राज्य सरकार ने ऐसे सरकारी महाविद्यालयों का विलय संबंधित जिला मुख्यालय स्थित कॉलेजों में करने का निर्णय लिया है, जहां सभी संकायों में कुल छात्र संख्या 75 से कम है। इसके अलावा सरकारी डिग्री कॉलेज कुकुमसेरी (लाहौल-स्पीति) का विलय सरकारी डिग्री कॉलेज कुल्लू में किया गया है। इन 10 महाविद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से नए प्रवेश नहीं लिए जाएंगे। वर्तमान में अध्ययनरत विद्यार्थियों को संबंधित जिला मुख्यालय स्थित कॉलेजों में समायोजित किया जाएगा।
विद्यार्थियों को मिलेगी छात्रवृत्ति
विलय किए गए महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को उनके अध्ययन की निरंतरता बनाए रखने के लिए संबंधित जिला मुख्यालय स्थित कॉलेजों में समायोजित किया जाएगा। वहीं कुकुमसेरी कॉलेज के विद्यार्थियों को सरकारी डिग्री कॉलेज कुल्लू में प्रवेश दिया जाएगा। सरकार ने ऐसे विद्यार्थियों के लिए प्रतिमाह 5,000 रुपये छात्रवृत्ति प्रदान करने का भी प्रावधान किया है, ताकि स्थानांतरण के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।