Himachal Government: चंबा में प्रायोजन योजना के तहत 22 नए बच्चों के मामलों को मंजूरी
Himachal Government: चंबा में मिशन वात्सल्य के अंतर्गत प्रायोजन एवं पालक देखभाल अनुमोदन समिति ने 22 नए बच्चों को प्रायोजन योजना का लाभ देने के मामलों को मंजूरी दी है। उपायुक्त मुकेश रेपस्वाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में पात्र बच्चों को आर्थिक एवं सामाजिक सहायता उपलब्ध करवाने, योजनाओं की नियमित समीक्षा करने और सहायता की निरंतरता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
चंबा
बैठक में बच्चों के संरक्षण, शिक्षा, कल्याण और समुचित विकास के लिए संचालित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा की गई। उपायुक्त ने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र बच्चों तक समयबद्ध रूप से पहुंचाना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को पात्र बच्चों की पहचान की प्रक्रिया सुदृढ़ करने, प्रत्येक मामले की नियमित समीक्षा करने और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए, ताकि कोई पात्र बच्चा सहायता से वंचित न रहे।

वर्तमान में 92 बच्चों को मिल रहा लाभ
जिला बाल संरक्षण अधिकारी ने समिति को बताया कि वर्तमान में प्रायोजन कार्यक्रम के तहत 92 बच्चों को लाभ दिया जा रहा है। बाल कल्याण समिति ने योजना से लाभान्वित 26 बच्चों का लाभ समाप्त करने से संबंधित मामलों की जानकारी भी बैठक में रखी। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि योजना से बाहर किए गए बच्चों में जो पात्र हैं, उन्हें आवश्यकता के अनुसार सुख आश्रय या सुख शिक्षा योजना से लाभान्वित करने की संभावनाओं पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
समिति ने 22 नए बच्चों को प्रायोजन योजना में शामिल करने से जुड़े मामलों की पात्रता और आवश्यक दस्तावेजों की समीक्षा की। समीक्षा के बाद सभी 22 नए मामलों को अनुमोदित कर दिया गया। बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान कुल 69 बच्चों को आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाने के प्रस्ताव पर भी विचार-विमर्श हुआ। उपायुक्त ने अधिकारियों को नियमानुसार और निर्धारित समय के भीतर पात्र बच्चों को आर्थिक सहायता देने के निर्देश दिए।
उपायुक्त ने आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त बजट की उपलब्धता के लिए महिला एवं बाल विकास निदेशालय के साथ जरूरी पत्राचार करने को भी कहा। बैठक में जिला बाल संरक्षण अधिकारी राजेश राम, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष युगल किशोर मरवाह, बाल संरक्षण अधिकारी रिंकू शर्मा और विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। समिति ने बाल हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए योजनाओं के क्रियान्वयन और लाभार्थियों को मिलने वाली सहायता की निरंतर निगरानी पर जोर दिया।