Himachal Government: पीएम आवास योजना की सहायता 3.63 लाख रुपये करने का प्रस्ताव विधानसभा में पारित
Himachal Government: हिमाचल विधानसभा ने प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों और बढ़ती निर्माण लागत को देखते हुए प्रधानमंत्री आवास योजना की सहायता राशि बढ़ाने का संशोधित प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित कर दिया। सत्ता पक्ष और विपक्ष की सहमति से पारित प्रस्ताव में पात्र लाभार्थियों की सहायता 1.30 लाख रुपये से बढ़ाकर 3.63 लाख रुपये करने की सिफारिश की गई है। दुर्गम क्षेत्रों के लिए इससे अधिक सहायता देने का प्रस्ताव भी रखा गया है। मामला अब केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।
शिमला
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि मौजूदा महंगाई में 1.30 लाख रुपये की सहायता हिमाचल जैसे पहाड़ी प्रदेश में पक्का मकान बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है। सीमेंट, ईंट, सरिया, रेत और मजदूरी की लागत बढ़ी है। इसके अलावा दुर्गम क्षेत्रों तक निर्माण सामग्री पहुंचाने पर भी अतिरिक्त खर्च आता है। उन्होंने इन परिस्थितियों के आधार पर आवास सहायता बढ़ाने के संकल्प को जरूरी बताया।
प्रदेश में 87,707 मकान स्वीकृत
मंत्री ने सदन को बताया कि वर्ष 2023-24 से 2025-26 के दौरान प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 87,707 मकान स्वीकृत हुए हैं। इनमें से 55,207 मकान पूरे हो चुके हैं, जबकि 32,497 मकानों का निर्माण चल रहा है। प्रदेश में वर्ष 2030 तक 2.37 लाख से अधिक आवास बनाने का लक्ष्य रखा गया है। पक्के मकान के लिए प्रति इकाई 3.63 लाख रुपये देने का प्रस्ताव 15 फरवरी 2026 को केंद्र सरकार को भेजा गया था, लेकिन 12 अगस्त की बैठक में इसे मंजूरी नहीं मिली।
संशोधित प्रस्ताव केंद्र को भेजा जाएगा
अब विधानसभा की भावना के अनुरूप संशोधित प्रस्ताव दोबारा केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार सहायता राशि बढ़ाती है तो प्रदेश सरकार भी अपना योगदान करीब 50 हजार रुपये तक बढ़ाने पर विचार कर सकती है। इससे पहले विधायक बिक्रम सिंह ठाकुर ने संकल्प प्रस्तुत करते हुए आवास सहायता कम से कम तीन लाख रुपये करने की मांग रखी थी।
विधायक विनोद कुमार ने कहा कि पहाड़ी राज्यों में निर्माण लागत का निर्धारण स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि गरीब परिवार को पक्का घर मिलने से उसका आत्मसम्मान बढ़ता है और किसी भी पात्र परिवार को आवास से वंचित नहीं रहना चाहिए। सत्ता पक्ष और विपक्ष की सहमति के बाद सदन ने संशोधित प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया।