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वित्तीय अनियमितताओं के मामले में मुख्य शिक्षक सेवा से बर्खास्त, शिक्षा विभाग ने जारी किए आदेश

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 23 Jul 2026 • 1 Min Read

शिक्षा विभाग ने विभागीय जांच में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सिद्ध होने के बाद एक मुख्य शिक्षक को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करते हुए विभाग ने सरकारी धन के दुरुपयोग और अभिलेखों में अनियमितताओं से जुड़े आरोपों को सही माना है।

शिमला

विभागीय जांच पूरी होने के बाद हुई कार्रवाई

हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग ने विभागीय जांच में आरोप सिद्ध होने के बाद मुख्य शिक्षक अशोक कुमार को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। विभाग के अनुसार संबंधित शिक्षक शिमला-3 में ब्लॉक रिसोर्स कोऑर्डिनेटर (बीआरसीसी) के पद पर कार्यरत रहे थे। उन पर सरकारी कार्यों के दौरान वित्तीय अनियमितताएं करने, निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं करने तथा सरकारी अभिलेखों के रखरखाव में अनियमितता बरतने के आरोप लगाए गए थे। विभागीय जांच पूरी होने के बाद उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा शिमला कार्यालय से बर्खास्तगी के आदेश जारी किए गए हैं।

परिवहन बिलों और सरकारी धन के उपयोग की हुई जांच

विभागीय आदेश के अनुसार जांच में परिवहन बिलों के प्रस्तुतिकरण, सरकारी रिकॉर्ड समय पर जमा न करने और सरकारी धन के उपयोग से जुड़े मामलों की विस्तार से समीक्षा की गई। शिक्षा विभाग को इस संबंध में शिकायत प्राप्त होने के बाद राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक विभाग की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट भी उपलब्ध कराई गई थी। इसके आधार पर विभाग ने विधिवत जांच समिति गठित कर दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य संबंधित अभिलेखों की जांच करवाई। जांच रिपोर्ट में संबंधित आरोपों को सही पाया गया।

शिक्षक को अपना पक्ष रखने का दिया गया अवसर

विभागीय जांच के दौरान संबंधित शिक्षक को सभी आरोपों की जानकारी उपलब्ध कराई गई और उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया। शिक्षक ने जांच अधिकारी के समक्ष लिखित स्पष्टीकरण भी प्रस्तुत किया। विभाग के अनुसार उपलब्ध कराए गए स्पष्टीकरण और रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद जांच अधिकारी ने उन्हें संतोषजनक नहीं माना। इसके बाद 30 जून 2026 को अंतिम जांच रिपोर्ट शिक्षा विभाग को सौंपी गई, जिसमें आरोपों की पुष्टि की गई।

पहले निलंबन, फिर सेवा से बर्खास्तगी

शिक्षा विभाग ने बताया कि प्रारंभिक जांच में वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिलने पर संबंधित शिक्षक को पहले निलंबित किया गया था। अंतिम विभागीय जांच पूरी होने और आरोप सिद्ध होने के बाद सेवा नियमों के तहत उन्हें बर्खास्त करने का निर्णय लिया गया। विभाग ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई विभागीय जांच रिपोर्ट, उपलब्ध दस्तावेजों और निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया के आधार पर की गई है।

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