हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मंडी जिले के बल्ह क्षेत्र में चिट्टे के मामले को रफा-दफा करने के लिए पुलिस अधिकारियों द्वारा रिश्वत मांगने की जांच सीबीआई से करवाने का आदेश दिया है। अदालत ने इस गंभीर मामले में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए सीबीआई को निर्देशित किया है।
सीबीआई जांच का आदेश: उच्च न्यायालय का निर्णय
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह और न्यायमूर्ति सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने इस मामले की गहन जांच के लिए सीबीआई को निर्देश दिया है। अदालत ने एफआईआर नंबर 106/2024 पर सीबीआई के पुलिस अधीक्षक को तुरंत आपराधिक रिपोर्ट दर्ज करने और जांच को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, अदालत ने डीजीपी को तीन दिनों के अंदर इस मामले से संबंधित सभी रिकॉर्ड सीबीआई को सौंपने के आदेश दिए हैं।
पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत में वीडियो प्रमाण प्रस्तुत किए, जिसमें कुछ पुलिस अधिकारी सादे कपड़ों में चिट्टा गाड़ी में रखते हुए और आरोपियों को ले जाते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो के आधार पर अदालत ने गंभीर साक्ष्यों पर ध्यान दिया और मामले की जांच को उचित दिशा में बढ़ाने के लिए सीबीआई से जांच कराने का फैसला लिया।
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चिट्टा मामला: क्या है आरोप?
बल्ह में तीन युवकों को 287 ग्राम चिट्टा के साथ गिरफ्तार किया गया था। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारियों ने फिरौती की मांग की और कहा कि यदि पैसों का इंतजाम किया जाए तो उसके बेटे पर एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत में यह भी दावा किया कि इन युवकों को गलत तरीके से फंसाया गया है।
याचिका में प्रमुख आरोप:
- 31 मार्च को याचिकाकर्ता को फोन आया, जिसमें बताया गया कि उसके बेटे दीपक को चिट्टे के साथ गिरफ्तार किया गया है।
- याचिकाकर्ता से कहा गया कि यदि वह एक लाख रुपये की राशि का इंतजाम करता है तो उसके बेटे को छुड़ा लिया जाएगा, वरना उसे मामले में फंसा दिया जाएगा।
- याचिकाकर्ता ने पैसे का प्रबंध किया और अपने तीन रिश्तेदारों के साथ नेरचौक की ओर रवाना हुए।
- रास्ते में बाबा बालक नाथ मंदिर के पास पुलिस ने उनकी गाड़ी रोकी, लेकिन पुलिस ने उनकी शिकायत पर कोई ध्यान नहीं दिया।
आगे की सुनवाई: अदालत का आदेश
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 3 मार्च को तय की है, जिसमें अदालत के आदेशों की अनुपालना पर विचार किया जाएगा। साथ ही, अदालत ने मुख्य सचिव को भी आदेश दिए हैं कि वह संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करें।
न्यायिक प्रक्रिया और फैसले की महत्ता
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का यह आदेश पुलिस विभाग के भीतर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण कदम है। उच्च न्यायालय ने यह सुनिश्चित किया है कि इस तरह के मामले में अत्याचार और भ्रष्टाचार के आरोपों की गहन जांच हो और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
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