शिक्षा विभाग की तबादला व्यवस्था पर हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला, स्टे क्लबिंग नियम रहेगा लागू
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग में लागू स्टे क्लबिंग नियम को प्रशासनिक आवश्यकता के अनुरूप मानते हुए कर्मचारी की अपील खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि निकटवर्ती स्कूलों में सेवा अवधि जोड़ने की व्यवस्था दूरदराज के विद्यालयों में रिक्त पदों को भरने के उद्देश्य से लागू की गई है।
शिमला
हाईकोर्ट ने स्टे क्लबिंग नियम को प्रशासनिक दृष्टि से उचित माना
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग में कर्मचारियों के तबादलों के लिए लागू ‘स्टे क्लबिंग’ (सेवा अवधि को जोड़ने) के नियम को वैध और प्रशासनिक आवश्यकता के अनुरूप माना है। मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी. नेगी की खंडपीठ ने कर्मचारी रविंदर सिंह की अपील को खारिज करते हुए एकल न्यायाधीश के पहले दिए गए आदेश को बरकरार रखा। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि यह व्यवस्था विभाग में संतुलित मानव संसाधन प्रबंधन सुनिश्चित करने और दूरदराज के विद्यालयों में लंबे समय से रिक्त पड़े पदों पर शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से लागू की गई है। न्यायालय ने माना कि ऐसी नीति प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक है।
तबादला आदेश को चुनौती, सेवा अवधि को लेकर उठा था विवाद
मामला सिरमौर जिले के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला शिवपुर से राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कोफोर्टा में किए गए तबादले से जुड़ा था। याचिकाकर्ता का कहना था कि शिवपुर विद्यालय में उनकी सेवा अवधि केवल 11 माह रही थी, इसलिए निर्धारित कार्यकाल पूरा न होने के कारण उनका स्थानांतरण उचित नहीं था। हालांकि शिक्षा विभाग ने अपने तबादला आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया था कि कर्मचारी की 10 किलोमीटर के दायरे में स्थित पूर्व तैनाती की सेवा अवधि को भी वर्तमान कार्यकाल के साथ क्लब किया गया है। इसी आधार पर कुल सेवा अवधि की गणना करते हुए तबादला आदेश जारी किया गया था। एकल न्यायाधीश द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद कर्मचारी ने इस निर्णय को खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी थी।
2023 के कार्यालय ज्ञापन को न्यायालय ने नियमसम्मत माना
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शिक्षा सचिव द्वारा 27 अक्टूबर 2023 को जारी कार्यालय ज्ञापन का भी परीक्षण किया। इस कार्यालय ज्ञापन के अनुसार 30 किलोमीटर के दायरे में स्थित विभिन्न शिक्षण संस्थानों में दी गई सेवाओं को एक ही स्टेशन पर सेवा अवधि मानते हुए क्लब किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि यह नीति कर्मचारियों के स्थानांतरण में पारदर्शिता और समानता बनाए रखने के साथ-साथ उन क्षेत्रों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है, जहां लंबे समय तक पद रिक्त रहने की समस्या बनी रहती है। न्यायालय ने माना कि विभाग को ऐसी प्रशासनिक नीतियां बनाने और लागू करने का अधिकार है, यदि उनका उद्देश्य सार्वजनिक हित और संस्थागत आवश्यकता की पूर्ति करना हो।
लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में तैनाती पर अदालत की टिप्पणी
खंडपीठ ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि शिक्षा विभाग में कुछ कर्मचारी स्थानांतरण नीति का उपयोग करते हुए निकटवर्ती विद्यालयों में लगातार तबादले करवाकर वर्षों तक एक ही भौगोलिक क्षेत्र में कार्यरत रहते हैं। अदालत के अनुसार, ऐसी स्थिति से दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में शिक्षकों के पद लंबे समय तक रिक्त रह सकते हैं। रिकॉर्ड का अवलोकन करने पर न्यायालय ने पाया कि याचिकाकर्ता पिछले लगभग 10 वर्षों से सिरमौर जिले के भीतर ही पांवटा साहिब, जौली और शिवपुर जैसे निकटवर्ती स्टेशनों पर कार्यरत रहे थे। अदालत ने माना कि यह अवधि सामान्य कार्यकाल से अधिक थी, इसलिए विभाग द्वारा स्टे क्लबिंग नियम लागू करते हुए किया गया तबादला नियमों के अनुरूप था। इन्हीं तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने कर्मचारी की अपील को खारिज करते हुए एकल न्यायाधीश के आदेश को यथावत बनाए रखा।