उद्योग / हिमाचल में उद्योगों के लिए बड़ी राहत, अब एक बार की एनओसी रहेगी 25 साल तक मान्य
हिमाचल प्रदेश में उद्योग स्थापित करने और उनका संचालन करने वाले उद्यमियों को अब बार-बार प्रदूषण संबंधी मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं होगी। राज्य सरकार ने उद्योगों के लिए सहमति प्रमाण पत्र (कंसेंट टू ऑपरेट) की प्रक्रिया को सरल बनाते हुए इसकी वैधता अवधि बढ़ाने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था के तहत उद्योगों को उनकी श्रेणी के अनुसार एक बार में 5 से 25 वर्ष तक के लिए एनओसी जारी की जाएगी, जिससे उद्योगों को समय और प्रशासनिक प्रक्रिया दोनों में राहत मिलेगी।
शिमला
अब बार-बार नहीं करवाना होगा नवीनीकरण
नई व्यवस्था लागू होने के बाद उद्योग संचालकों को निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले बार-बार आवेदन कर सहमति प्रमाण पत्र का नवीनीकरण नहीं कराना पड़ेगा। उद्योगों की श्रेणी और प्रदूषण स्तर के आधार पर प्रमाण पत्र की वैधता तय की जाएगी। इससे कागजी प्रक्रिया कम होगी और उद्योग संचालन पहले की तुलना में अधिक आसान बनेगा।
हजारों उद्यमियों को मिलेगा सीधा लाभ
सरकार के इस फैसले से प्रदेश के लगभग 12,500 पंजीकृत उद्योगों को लाभ मिलने की उम्मीद है। नई प्रणाली लागू होने के बाद उद्योगों को मंजूरी के लिए अनावश्यक औपचारिकताओं और बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी। इससे उद्योगों का समय बचेगा और प्रशासनिक कार्यों में भी तेजी आएगी।
क्षेत्रीय कार्यालयों को भी मिले अधिकार
सहमति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को तेज बनाने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपने क्षेत्रीय और अधीनस्थ कार्यालयों को भी आवश्यक अधिकार प्रदान किए हैं। साथ ही आवेदन के निस्तारण के लिए समयसीमा तय की गई है, ताकि उद्योगों को समय पर मंजूरी मिल सके और किसी प्रकार की अनावश्यक देरी न हो।
निवेश और औद्योगिक विकास को मिलेगा बढ़ावा
सरकार का मानना है कि इस निर्णय से प्रदेश में निवेश का माहौल बेहतर होगा और ‘स्पीड ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा मिलेगा। उद्योगों के लिए मंजूरी प्रक्रिया आसान होने से नए निवेशकों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी, जबकि पहले से संचालित उद्योगों को भी अधिक सुगमता के साथ अपना संचालन जारी रखने का अवसर मिलेगा।