हिमाचल में नई उद्योग नीति का प्रारूप तैयार, उद्योगपतियों को मिल सकती हैं नई रियायतें
हिमाचल प्रदेश में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए लंबे समय से तैयार की जा रही नई उद्योग नीति का प्रारूप अब तैयार हो गया है। उच्चाधिकारियों के स्तर पर प्रस्ताव पर चर्चा और आवश्यक सुझावों के बाद इसे अंतिम रूप दे दिया गया है। अब मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के साथ चर्चा के बाद तय होगा कि नई नीति को आगामी मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी के लिए लाया जाए या नहीं।
शिमला
नई उद्योग नीति को लेकर सरकार की ओर से संबंधित विभागों के साथ लगातार चर्चा की गई है। उद्योग विभाग के अलावा जल शक्ति विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और बिजली बोर्ड से भी आवश्यक सूचनाएं जुटाई गई हैं। वहीं, नीति को अंतिम रूप देने से पहले उद्योगपतियों की मांगों और सुझावों को भी इसमें शामिल किया गया है।
उद्योगपतियों को नई रियायतों की उम्मीद
नई नीति में उद्योगपतियों को पहले से बेहतर सुविधाएं और रियायतें देने की तैयारी है। उद्योग क्षेत्र की सबसे प्रमुख मांगों में बिजली की दरों में कमी शामिल है। उद्योगपतियों का कहना है कि पड़ोसी राज्यों की तुलना में हिमाचल में औद्योगिक बिजली महंगी है, जिससे यहां नए उद्योग स्थापित करने में प्रतिस्पर्धात्मक दिक्कत आती है।
सरकार नई नीति में बिजली से संबंधित राहत के लिए भी प्रावधान करने पर विचार कर रही है। हालांकि बिजली की दरें विद्युत नियामक आयोग तय करता है, लेकिन सरकार अपनी ओर से सब्सिडी देकर उद्योगों को राहत दे सकती है। इसी दिशा में नीति में कुछ प्रावधान किए जाने की बात सामने आई है।
पुरानी नीति को कई बार मिला था विस्तार
नई उद्योग नीति की जरूरत इसलिए भी महसूस की जा रही थी क्योंकि प्रदेश की पुरानी उद्योग नीति को पिछले समय में तीन से चार बार विस्तार दिया जा चुका है। नई नीति तैयार करने के दौरान इसमें लगातार बदलाव किए गए और उद्योगपतियों से भी राय ली गई।
उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान के अनुसार नई उद्योग नीति तैयार है और सरकार जल्द इस पर फैसला लेगी। उनका कहना है कि प्रदेश में उद्योग क्षेत्र का तेजी से विकास करने के लिए नई नीति जरूरी है। सरकार का उद्देश्य हिमाचल में अधिक से अधिक उद्योग स्थापित करना है, ताकि निवेश के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ें।
अब मुख्यमंत्री के साथ प्रस्ताव पर होने वाली चर्चा के बाद ही अंतिम निर्णय होगा कि नई उद्योग नीति का प्रारूप आगामी मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाता है या नहीं।