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आउटसोर्स कर्मचारियों पर सरकार का साफ रुख, नियमितीकरण पर फिलहाल नहीं कोई नीति,विधानसभा में दिया पूरा वित्तीय ब्यौरा

PRIYANKA THAKUR 1 Apr 2026 Edited 1 Apr 1 min read

Himachalnow / शिमला

हिमाचल प्रदेश सरकार ने विधानसभा में बताया कि आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए कोई स्थायी नीति प्रस्तावित नहीं है। सरकार ने वेतन, भत्तों और पेंशन पर होने वाले मासिक खर्च का भी विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया।

शिमला

आउटसोर्स कर्मचारियों पर सरकार की स्थिति स्पष्ट
विधानसभा में विधायक प्रकाश राणा और डॉ. जनक राज द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बताया कि आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित करने के लिए फिलहाल कोई स्थायी नीति नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य में विभिन्न विभागों में करीब 13,000 कर्मचारी आउटसोर्स आधार पर कार्यरत हैं। सरकार ने स्पष्ट किया कि आउटसोर्स कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारी की श्रेणी में नहीं रखा जाता और उनके लिए अलग से स्थायी नियुक्ति का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

वेतन और मासिक व्यय का विवरण
सरकार ने जानकारी दी कि नियमित और संविदा कर्मचारियों के वेतन व भत्तों पर प्रति माह लगभग 1,172 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके मुकाबले आउटसोर्स कर्मचारियों पर मासिक खर्च लगभग 19 करोड़ रुपये है। यह अंतर दर्शाता है कि आउटसोर्स व्यवस्था के तहत सीमित वित्तीय व्यय किया जा रहा है, जबकि नियमित कर्मचारियों पर व्यय अधिक है।

पेंशन व्यय और वित्तीय स्थिति
वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान राज्य सरकार ने पेंशनरों को कुल 10,536 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। अधिकारियों ने बताया कि पेंशन से संबंधित सभी आंकड़े कोषागार और अकाउंट्स संगठन द्वारा संधारित किए जाते हैं और इसमें विभाग या श्रेणी के आधार पर अलग-अलग वर्गीकरण नहीं किया जाता। सभी सेवानिवृत्त कर्मचारियों को एक ही पेंशनर श्रेणी में शामिल किया जाता है।

आउटसोर्स व्यवस्था और दिशा-निर्देश
सरकार ने बताया कि नियमित पदों को आउटसोर्सिंग के माध्यम से नहीं भरा जाता है। हालांकि, कुछ सेवाओं को हिमाचल प्रदेश वित्तीय नियम, 2009 के तहत निर्धारित टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से आउटसोर्स किया गया है। आउटसोर्स कर्मचारियों के कार्य-परिस्थितियों और सेवा शर्तों को लेकर सरकार ने 1 जुलाई 2017 और 18 जनवरी 2021 को दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनके अनुसार सेवा प्रदाता एजेंसियों को प्रत्येक माह की 7 तारीख तक वेतन देना अनिवार्य है।