Himachalnow / शिमला
हिमाचल प्रदेश में बड़े उद्योगों को प्रति यूनिट बिजली पर मिलने वाली एक रुपये की सब्सिडी को बंद करने के फैसले को चुनौती दी गई है। इस फैसले को एकल न्यायाधीश द्वारा पारित किया गया था, जिसे अब डबल बेंच में चुनौती दी गई है। अदालत ने राज्य सरकार और राज्य विद्युत बोर्ड को इस मामले में अपना जवाब दायर करने के आदेश दिए हैं। अगली सुनवाई 2 जनवरी 2025 को होगी।
सब्सिडी बंद करने के फैसले को चुनौती
हिमाचल प्रदेश में बड़े उद्योगों को मिलने वाली बिजली सब्सिडी को अचानक बंद करने का निर्णय लिया गया था, जिसे उद्योगों ने कोर्ट में चुनौती दी। यह मामला हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए प्रस्तुत हुआ। उद्योगों की ओर से उड़ीसा हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एस मुरलीधर और वरिष्ठ अधिवक्ता ने अपनी दलीलें प्रस्तुत कीं।
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सरकार की अधिसूचना को ‘अतार्किक’ बताया
एस मुरलीधर ने अदालत में कहा कि सरकार द्वारा 3 मार्च 2024 को जारी की गई अधिसूचना तर्कसंगत नहीं है। इस अधिसूचना के तहत राज्य सरकार ने बड़े उद्योगों को मिलने वाली 1 रुपये प्रति यूनिट की सब्सिडी को वापस लेने का निर्णय लिया था। उनका कहना था कि राज्य विद्युत विनियामक आयोग ने बिना सही तरीके से विचार किए हुए इस अधिसूचना को लागू कर दिया, जो कि गलत था।
टैरिफ और सब्सिडी में फर्क
उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि टैरिफ और सब्सिडी दो अलग-अलग मुद्दे हैं। जहां टैरिफ में हर साल एक बार ही संशोधन किया जा सकता है, वहीं सब्सिडी में बदलाव बिना टैरिफ संशोधन के नहीं किया जा सकता। उनका तर्क था कि यदि सब्सिडी में बदलाव करना है, तो इसे टैरिफ संशोधन के माध्यम से किया जाना चाहिए था।
अदालत ने राज्य सरकार और बिजली बोर्ड से जवाब मांगा
इस मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की पीठ द्वारा की गई। अदालत ने राज्य सरकार से पूछा कि आखिर क्यों उन्होंने सब्सिडी को बंद करने का फैसला लिया। इसके साथ ही अदालत ने राज्य विद्युत बोर्ड और राज्य सरकार को इस मामले में अपना जवाब दायर करने का निर्देश दिया है।
सरकार और बिजली बोर्ड का पक्ष
राज्य सरकार और बिजली बोर्ड ने इस मामले में अपनी दलीलें पेश कीं। उनके अनुसार, टैरिफ में कोई बदलाव नहीं किया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिर्फ 1 रुपये की सब्सिडी को समाप्त किया गया है, जबकि टैरिफ के दरों में कोई संशोधन नहीं हुआ है।
इसके अलावा, सरकार ने रेगुलेटरी कमीशन को निर्देश दिया था कि वह इस मामले में सब्सिडी वापस लेने के लिए अधिसूचना जारी करें, जिसके बाद आयोग ने इसका पालन करते हुए सब्सिडी को समाप्त करने का फैसला लिया था।
उद्योगों पर प्रभाव
राज्य सरकार के इस फैसले से हिमाचल प्रदेश में कार्यरत करीब 200 कंपनियां प्रभावित हो रही हैं। इन उद्योगों को 1 रुपये प्रति यूनिट की सब्सिडी दी जा रही थी, जो अब बंद कर दी गई है। इस कदम से उद्योगों में चिंताएं बढ़ गई हैं, क्योंकि यह उनके लिए वित्तीय दबाव का कारण बन सकता है।
अगली सुनवाई की तारीख
इस मामले में अगली सुनवाई 2 जनवरी 2025 को होगी। अदालत ने दोनों पक्षों से और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए इस तारीख पर सुनवाई करने का आदेश दिया है। इस दौरान यह स्पष्ट होगा कि राज्य सरकार के इस फैसले को न्यायालय में कितनी सफलता मिलती है या क्या इसे वापस लिया जाएगा।
निष्कर्ष
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में बड़ी उद्योगों को मिलने वाली बिजली सब्सिडी को बंद करने के फैसले को चुनौती दी गई है। यह मामला न केवल उद्योगों, बल्कि राज्य सरकार और बिजली बोर्ड के लिए भी महत्वपूर्ण है। अदालत ने दोनों पक्षों से जवाब मांगा है और अब 2 जनवरी 2025 को इस पर अगली सुनवाई होगी।
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