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भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए लोक निर्माण विभाग सशक्त और तकनीक आधारित कार्य प्रणाली अपनाएः मुख्यमंत्री

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 7 Hours Ago • 1 Min Read

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने लोक निर्माण विभागों में गुणवत्ता आश्वासन विषय पर आयोजित उत्तर क्षेत्रीय अंतर-राज्यीय संवाद सत्र की अध्यक्षता करते हुए विभाग के कार्यक्षेत्र के विस्तार और आधुनिक तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों और अभियंताओं ने भाग लिया।

शिमला

उत्तर क्षेत्रीय संवाद सत्र में हुई विभागीय सुधारों पर चर्चा

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शिमला में आयोजित ‘लोक निर्माण विभागों में गुणवत्ता आश्वासन’ विषयक उत्तर क्षेत्रीय अंतर-राज्यीय संवाद सत्र की अध्यक्षता की। इस संवाद सत्र में हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और राजस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों, अभियंताओं तथा तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य लोक निर्माण विभागों में गुणवत्ता नियंत्रण, आधुनिक निर्माण तकनीकों, क्षमता निर्माण और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप अधोसंरचना विकास से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श करना था। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भविष्य की आवश्यकताओं और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए लोक निर्माण विभाग में विभिन्न सुधारात्मक पहल कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों के दौरान हिमाचल प्रदेश ने कई प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया है, जिनके दौरान सड़क संपर्क बहाल करने, क्षतिग्रस्त अवसंरचना की मरम्मत करने और आवश्यक सेवाओं को सुचारू बनाए रखने में विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

जलवायु परिवर्तन और अवसंरचना चुनौतियों पर फोकस

मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं का प्रभाव हिमाचल प्रदेश सहित पर्वतीय राज्यों में स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य का लगभग 90 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र पर्वतीय है, जहां सड़क संपर्क केवल परिवहन का माध्यम नहीं बल्कि लोगों की दैनिक आवश्यकताओं, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और आर्थिक गतिविधियों से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि बदलती परिस्थितियों को देखते हुए लोक निर्माण विभाग को पारंपरिक सड़क और भवन निर्माण कार्यों से आगे बढ़कर सुरंग निर्माण, बहुमंजिला भवनों, आपदा-रोधी संरचनाओं तथा अन्य उन्नत अधोसंरचना परियोजनाओं में भी अपनी विशेषज्ञता विकसित करनी होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई तकनीकों और आधुनिक कार्य प्रणालियों को अपनाने में प्रारंभिक स्तर पर चुनौतियां आ सकती हैं, लेकिन दीर्घकालिक और टिकाऊ विकास सुनिश्चित करने के लिए इनका उपयोग आवश्यक है।

वर्ष 2050 तक बढ़ सकती है पुनर्निर्माण लागत

मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले वर्षों में प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित अवसंरचना का पुनर्निर्माण राज्य के सामने प्रमुख चुनौतियों में शामिल रहेगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का लगभग चार प्रतिशत हिस्सा आपदा पुनर्निर्माण और संबंधित कार्यों पर व्यय किया जा रहा है। विभिन्न आकलनों के अनुसार वर्ष 2050 तक यह व्यय बढ़कर लगभग 14 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि इस संभावित स्थिति को देखते हुए विभाग की तकनीकी क्षमता बढ़ाना, आधुनिक निर्माण तकनीकों को अपनाना और संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार भविष्य में लोक निर्माण विभाग के कार्यक्षेत्र को विस्तारित करने की संभावनाओं पर विचार कर रही है, ताकि विभाग बांध निर्माण और अन्य बड़े अधोसंरचना क्षेत्रों में भी अपनी भूमिका निभा सके।

नई तकनीकों और रख-रखाव व्यवस्था पर बल

लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि क्षमता निर्माण, तकनीकी उन्नयन और आधुनिक निर्माण पद्धतियों को अपनाना वर्तमान समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के संवाद सत्र अभियंताओं और तकनीकी अधिकारियों को नवीन तकनीकों, गुणवत्ता मानकों और बेहतर कार्य प्रणालियों की जानकारी उपलब्ध कराने में सहायक होते हैं। उन्होंने ग्लोबल वार्मिंग और बदलती जलवायु परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर भारत के राज्यों को अधोसंरचना विकास में नवाचार आधारित समाधानों और नई कार्यप्रणालियों को अपनाने की आवश्यकता है। मंत्री ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में लगभग 45,000 किलोमीटर लंबा सड़क नेटवर्क है और राज्य की अधिकांश पंचायतें सड़क संपर्क सुविधा से जुड़ चुकी हैं। ऐसे में इस व्यापक सड़क नेटवर्क का नियमित रख-रखाव, मरम्मत और गुणवत्ता सुनिश्चित करना विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि सड़कों की गुणवत्ता और उनकी आयु बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने नई ड्रेनेज नीति तैयार की है। इस नीति का उद्देश्य वर्षा जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाना और सड़क क्षति को कम करना है। मंत्री ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और निर्माण सामग्री की लागत में वृद्धि का प्रभाव विकास परियोजनाओं पर पड़ रहा है, जिससे परियोजनाओं की लागत और वित्तीय प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियां बढ़ी हैं। इन परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए विभाग विभिन्न स्तरों पर रणनीतिक उपायों पर कार्य कर रहा है।

पुस्तक का विमोचन और अधिकारियों की सहभागिता

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘क्वालिटी कंट्रोल फॉर रोड वर्क्स’ नामक पुस्तक का विमोचन भी किया। इस पुस्तक का उद्देश्य सड़क निर्माण कार्यों में गुणवत्ता नियंत्रण से संबंधित मानकों और प्रक्रियाओं की जानकारी उपलब्ध कराना है। संवाद सत्र में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, विधायक विवेक शर्मा, विशेष सचिव सामान्य प्रशासन हरबंस सिंह ब्रसकॉन, लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ एस.पी. जगोटा सहित विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी, अभियंता और तकनीकी विशेषज्ञ उपस्थित रहे। कार्यक्रम में गुणवत्ता आश्वासन, आधुनिक निर्माण तकनीकों, आपदा प्रबंधन, सड़क अवसंरचना के रख-रखाव तथा भविष्य की विकास आवश्यकताओं से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।