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हिमाचल में सुपर-स्पेशियलिटी चिकित्सकों को मिलेगा नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस, स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर जोर

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 3 Hours Ago • 1 Min Read

हिमाचल प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से सुपर-स्पेशियलिटी चिकित्सकों को नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस प्रदान करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक में मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता, स्वास्थ्य अवसंरचना के उन्नयन, चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती तथा प्रदेशभर में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से जुड़े विभिन्न विषयों की समीक्षा की।

शिमला

स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की वर्तमान स्थिति, चल रही परियोजनाओं और भविष्य की योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए सुपर-स्पेशियलिटी चिकित्सकों को नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस प्रदान करेगी, जिससे विशेषज्ञ डॉक्टरों को प्रोत्साहन मिलेगा और सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में विशेषज्ञ सेवाओं को और मजबूत किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के लोगों को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाना सरकार की प्रमुख प्रतिबद्धताओं में शामिल है।

स्वास्थ्य अवसंरचना को किया जा रहा मजबूत

मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले साढ़े तीन वर्षों के दौरान स्वास्थ्य अवसंरचना को सुदृढ़ बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। राज्य के मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों को अत्याधुनिक उपकरणों और पर्याप्त मानव संसाधन से सुसज्जित करने की दिशा में कार्य जारी है। इसके अलावा आधुनिक चिकित्सा मशीनरी, डायग्नोस्टिक उपकरणों और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं की खरीद पर लगभग 3,000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जिससे मरीजों को प्रदेश के भीतर ही बेहतर उपचार उपलब्ध हो सके।

क्षेत्रीय और जोनल अस्पतालों के उन्नयन पर फोकस

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन जिलों में मेडिकल कॉलेज स्थापित नहीं हैं, वहां क्षेत्रीय और जोनल अस्पतालों को चरणबद्ध तरीके से उन्नत किया जा रहा है। इन अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं, आधुनिक जांच सुविधाओं और आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह है कि लोगों को उपचार के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े और उन्हें अपने जिले या निकटवर्ती क्षेत्र में ही गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त हों। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वह आने वाले महीनों में विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों का दौरा कर चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों से सीधे संवाद करेंगे।

भर्ती प्रक्रिया और आधुनिक सुविधाओं की समीक्षा

बैठक के दौरान डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ, तकनीशियनों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के रिक्त पदों को भरने के लिए चल रही भर्ती प्रक्रियाओं की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए ताकि स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध कराया जा सके। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पहली बार रोबोटिक सर्जरी जैसी उन्नत चिकित्सा सुविधा शुरू की गई है। इस सुविधा के शुरू होने से मरीजों को जटिल उपचार के लिए अन्य राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा तथा समय और खर्च दोनों की बचत होगी।

सीएचसी का होगा जनसंख्या आधारित वर्गीकरण

मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) का वर्गीकरण संबंधित क्षेत्रों की जनसंख्या और वास्तविक आवश्यकता के आधार पर किया जाए। उन्होंने कहा कि इससे प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र में आवश्यक संख्या में चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ और आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा सकेंगी। जनसंख्या आधारित योजना से स्वास्थ्य संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा और ग्रामीण तथा दूरदराज क्षेत्रों के लोगों को अपने घरों के निकट स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलेगा।बैठक में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, महाधिवक्ता अनूप रतन, विशेष सचिव डॉ. अश्विनी कुमार शर्मा, जितेंद्र सांजटा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रबंध निदेशक प्रदीप ठाकुर, हिमाचल प्रदेश मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक दिव्यांशु सिंगल सहित स्वास्थ्य विभाग और संबंधित संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न योजनाओं, भर्ती प्रक्रियाओं, चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता और संस्थागत सुधारों की प्रगति की भी समीक्षा की गई।