हिमाचल विश्वविद्यालय स्थापना दिवस पर राज्यपाल बोले, आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा का समन्वय जरूरी
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के 57वें स्थापना दिवस समारोह में राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक मूल्यों और अनुसंधान को सशक्त बनाने पर बल दिया। उन्होंने विश्वविद्यालयों में नवाचार, पर्यावरण संरक्षण, आपदा प्रबंधन और समाज से जुड़े शोध को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताते हुए विद्यार्थियों के समग्र विकास पर जोर दिया।
शिमला
57वें स्थापना दिवस समारोह को किया संबोधित
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने विश्वविद्यालय के 57वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यावसायिक कौशल तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों में चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्य और समाज सेवा की भावना का विकास भी आवश्यक है। उनके अनुसार आधुनिक शिक्षा और भारतीय ज्ञान परंपरा का समन्वय आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
शोध और नवाचार को मजबूत करने पर दिया जोर
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं शोध उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि एनएएसी का ‘ए’ ग्रेड संस्थान की गुणवत्ता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि स्थापना दिवस उपलब्धियों के मूल्यांकन और भविष्य की दिशा तय करने का अवसर भी होता है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाओं, पर्यावरण संरक्षण और नई तकनीकों से जुड़े शोध को और सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही भारतीय ज्ञान परंपरा, क्षेत्रीय भाषाओं, औषधीय पौधों, जैविक खेती और अंतरविषयक शोध में नवाचार को प्रोत्साहित करने की बात कही।
शिक्षकों से गांवों से जुड़ने का आह्वान
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के शिक्षकों से प्रत्येक शिक्षक द्वारा एक गांव अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक विकास से जुड़े कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभाकर समाज के साथ विश्वविद्यालय की भूमिका को और मजबूत कर सकते हैं।
विद्यार्थियों के समग्र विकास पर दिया बल
“विद्यार्थम आगच्छ, सेवार्थम निर्गच्छ” का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय से निकलने वाले विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक के साथ भारतीय संस्कृति और मूल्यों को भी अपनाना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वैज्ञानिक प्रगति और भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का समन्वय देश को वैश्विक ज्ञान नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाने में सहायक होगा।
उत्कृष्ट कार्य करने वालों को किया सम्मानित
समारोह के दौरान राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के उत्कृष्ट शिक्षकों, शोधकर्ताओं और कर्मचारियों को सम्मानित किया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि संस्थान को नवाचार एवं अनुसंधान के लिए एआरटीआरएसी से शोध अनुदान प्राप्त हुआ है। इसके अतिरिक्त रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की 82 लाख और 87 लाख रुपये की दो शोध परियोजनाएं भी स्वीकृत हुई हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने के लिए विश्वविद्यालय में नए अंतरविषयक केंद्र और कौशल आधारित पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं।