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एचआरटीसी बस निरीक्षण प्रक्रिया में अनियमितता का मामला, दो इंस्पेक्टर और एक परिचालक निलंबित

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 1 Hour Ago • 1 Min Read

हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम के मंडी डिविजन में बस निरीक्षण प्रक्रिया से जुड़ी अनियमितताओं की जांच के बाद दो इंस्पेक्टर और एक परिचालक को निलंबित किया गया है। निगम प्रबंधन ने मामले में विभागीय जांच शुरू कर दी है तथा सभी क्षेत्रीय प्रबंधकों को निरीक्षण प्रक्रिया की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।

शिमला

निरीक्षण प्रक्रिया में अनियमितता की जांच

हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम (HRTC) के मंडी डिविजन में बस निरीक्षण प्रक्रिया से जुड़ी अनियमितताओं की जांच के दौरान यह मामला सामने आया। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि दो इंस्पेक्टरों ने अपनी अधिकृत लॉग-इन आईडी परिचालकों को उपलब्ध कराई, जिसके माध्यम से परिचालकों ने स्वयं टिकटिंग मशीन में निरीक्षण संबंधी प्रविष्टियां दर्ज कीं। निगम के अनुसार यह प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं है, क्योंकि निरीक्षण का कार्य अधिकृत इंस्पेक्टर द्वारा मौके पर स्वयं किया जाना आवश्यक होता है। मामले की पुष्टि के बाद निगम प्रबंधन ने दो इंस्पेक्टरों और एक परिचालक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी है। वहीं एक अन्य परिचालक को सरकारी गवाह बनाया गया है, जबकि दूसरे संबंधित परिचालक से भी विभागीय प्रक्रिया के तहत बयान लिए जा रहे हैं।

बस निरीक्षण की निर्धारित प्रक्रिया

एचआरटीसी में बसों की नियमित जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि सभी यात्रियों के पास वैध टिकट हो और टिकटिंग प्रणाली निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित हो रही हो। निरीक्षण के दौरान इंस्पेक्टर बस को रोककर परिचालक की इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग मशीन अपने नियंत्रण में लेते हैं और उसे लॉक करने के बाद अपनी अधिकृत लॉग-इन आईडी के माध्यम से निरीक्षण प्रक्रिया शुरू करते हैं। इसके बाद मशीन से स्टेटमेंट निकाली जाती है और उसका बस में मौजूद यात्रियों के टिकटों से मिलान किया जाता है। निरीक्षण पूरा होने पर मशीन में डिजिटल प्रविष्टि दर्ज होती है, जो सीधे निगम के सॉफ्टवेयर में अपडेट हो जाती है। मुख्यालय स्तर पर इसी रिकॉर्ड के आधार पर यह देखा जाता है कि किस अधिकारी ने किस दिन कितनी बसों का निरीक्षण किया और जांच के दौरान क्या निष्कर्ष सामने आए।

जांच में सामने आए तथ्य

विभागीय जांच के दौरान यह भी पाया गया कि जिन मामलों की जांच की गई, उनमें निरीक्षण प्रविष्टियां परिचालकों द्वारा इंस्पेक्टर की लॉग-इन आईडी का उपयोग कर दर्ज की गई थीं। इसके अतिरिक्त कई मामलों में यात्रा बिलों पर निरीक्षण करने वाले अधिकारी के आवश्यक हस्ताक्षर भी उपलब्ध नहीं पाए गए, जबकि यह प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा है। जांच के दौरान सरकारी गवाह बनाए गए एक परिचालक ने अपने बयान में स्वीकार किया कि उसने संबंधित इंस्पेक्टर के निर्देश पर लॉग-इन आईडी का उपयोग कर निरीक्षण प्रविष्टियां दर्ज की थीं। निगम प्रबंधन के अनुसार दूसरे परिचालक से भी पूछताछ की जा रही है और उसके बयान को विभागीय जांच का हिस्सा बनाया जाएगा। उपलब्ध दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और संबंधित कर्मचारियों के बयानों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

निगम प्रबंधन ने दिए समीक्षा के निर्देश

मामले के सामने आने के बाद एचआरटीसी मुख्यालय ने सभी क्षेत्रीय प्रबंधकों (RM) को अपने-अपने डिविजनों में बस निरीक्षण प्रक्रिया की नियमित समीक्षा करने के निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि निरीक्षण रिकॉर्ड, लॉग-इन उपयोग, टिकटिंग मशीन की प्रविष्टियों और यात्रा बिलों का मिलान कर यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी निरीक्षण निर्धारित नियमों के अनुसार ही किए गए हैं। यदि किसी अन्य डिविजन में भी इसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित मामलों की अलग से जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। निगम का उद्देश्य निरीक्षण प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखना और निर्धारित प्रक्रिया का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करना है।

अधिकारियों का बयान

एचआरटीसी के मुख्य महाप्रबंधक पंकज सिंघल ने बताया कि मामले में दो इंस्पेक्टरों और एक परिचालक को निलंबित किया गया है तथा विभागीय जांच जारी है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड, संबंधित कर्मचारियों के बयान और जांच अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर पूरे मामले का परीक्षण किया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद सेवा नियमों के अनुरूप आगे की प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी और यदि आवश्यक हुआ तो अतिरिक्त अनुशासनात्मक कदम भी उठाए जाएंगे।

आगे की प्रक्रिया

निलंबन के बाद संबंधित अधिकारियों और कर्मचारी को विभागीय नियमों के तहत चार्जशीट जारी की जाएगी तथा उनसे लिखित स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। इसके बाद जांच अधिकारी सभी दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड, यात्रा बिलों, निरीक्षण प्रविष्टियों और संबंधित कर्मचारियों के बयानों का परीक्षण करेंगे। सभी पक्षों का जवाब प्राप्त होने के बाद सेवा नियमों के अनुरूप अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो विभागीय नियमों के तहत चेतावनी, वेतन वृद्धि रोकने, अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई या सेवा से बर्खास्तगी तक की कार्रवाई भी की जा सकती है। निगम प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया विभागीय नियमों और जांच रिपोर्ट के आधार पर ही पूरी की जाएगी।

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