HPRCA / हिमाचल की सरकारी भर्ती परीक्षाओं के लिए टीसीएस से तीन साल का करार
HPRCA / हिमाचल प्रदेश में सरकारी भर्ती परीक्षाओं के लिए तकनीकी निगरानी की नई व्यवस्था लागू होगी। राज्य चयन आयोग ने कंप्यूटर आधारित टेस्ट कराने के लिए टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस के साथ तीन साल का करार किया है। संतोषजनक प्रदर्शन पर अनुबंध दो साल बढ़ाया जा सकेगा। गड़बड़ी या लापरवाही होने पर कंपनी पर जुर्माना लगाने और जरूरत पड़ने पर उसके खर्च पर दोबारा परीक्षा कराने का प्रावधान भी किया गया है।
शिमला
सरकार ने शुक्रवार को विधानसभा में भाजपा विधायक डॉ. जनक राज, सुधीर शर्मा, लोकेंद्र कुमार और दीप राज के संयुक्त सवाल के लिखित जवाब में भर्ती परीक्षाओं तथा नई परीक्षा व्यवस्था का ब्योरा दिया। सरकार के अनुसार राज्य चयन आयोग के गठन से 31 जुलाई 2025 तक विभिन्न विभागों में 2,977 अभ्यर्थियों की नियुक्ति के लिए संस्तुतियां भेजी जा चुकी हैं। नई व्यवस्था के तहत परीक्षा संचालन में तकनीक, निगरानी और जवाबदेही पर विशेष ध्यान दिया गया है।
29 केंद्रों पर कंप्यूटर आधारित परीक्षा
कंप्यूटर आधारित टेस्ट के लिए प्रदेश में 29 परीक्षा केंद्र तैयार किए गए हैं। इन केंद्रों की एक शिफ्ट में कुल क्षमता 3,449 अभ्यर्थियों की है। प्रत्येक केंद्र पर पांच से दस प्रतिशत अतिरिक्त कंप्यूटर नोड्स बफर के रूप में उपलब्ध रहेंगे। बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति से निपटने के लिए यूपीएस और डीजी सेट रखना अनिवार्य किया गया है। सभी केंद्रों की गतिविधियों पर हमीरपुर स्थित आयोग के कमांड सेंटर से रीयल टाइम सीसीटीवी लाइव स्ट्रीमिंग के माध्यम से नजर रखी जाएगी।
अभ्यर्थियों का फोटो और फिंगरप्रिंट सहित बायोमेट्रिक पंजीकरण परीक्षा के दौरान तथा दस्तावेज सत्यापन के समय अनिवार्य होगा। एडमिट कार्ड या परिणाम जारी करने में देरी, परीक्षा केंद्र समय पर तैयार नहीं होने या 15 मिनट से अधिक तकनीकी खराबी आने पर प्रभावित अभ्यर्थियों की संख्या के आधार पर जुर्माना लगाया जा सकेगा। परीक्षा व्यवस्था में लापरवाही की स्थिति में टीसीएस पर सेवा स्तर समझौते के तहत तय कार्रवाई की जाएगी।
कदाचार और पेपर लीक पर जुर्माने का प्रावधान
टीसीएस के स्टाफ की संलिप्तता से कदाचार सामने आने पर कंपनी पर प्रति घटना पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। बाहरी कदाचार की स्थिति में प्रति घटना एक लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है। पेपर लीक होने या परीक्षा की शुचिता भंग होने पर कंपनी को अपने खर्च पर दोबारा परीक्षा करानी होगी। इसके अतिरिक्त संबंधित शिफ्ट की कुल लागत का पांच प्रतिशत जुर्माना भी देना होगा।
सरकार के आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन वर्षों में हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग ने 143 अधिसूचनाएं जारी कीं और 107 परीक्षाएं आयोजित कीं। इस अवधि में 105 अंतिम परिणाम घोषित किए गए तथा 2,784 अभ्यर्थियों की नियुक्ति के लिए संस्तुति की गई। सरकार ने बताया कि फिलहाल लोक सेवा आयोग की कोई भी विज्ञापित परीक्षा लंबित नहीं है।
स्कूली शिक्षा विभाग में सबसे अधिक पद
विभागवार स्थिति में स्कूली शिक्षा विभाग में सबसे अधिक 6,097 नियमित पद स्वीकृत बताए गए हैं। इनमें 2,477 पद बैचवाइज और 415 पद राज्य चयन आयोग के माध्यम से भरने की प्रक्रिया में हैं। इसके अतिरिक्त 431 और 46 पद पूर्व सैनिकों एवं उनके आश्रितों के माध्यम से भरे जाने हैं। पुलिस विभाग में 1,260, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग में 329, अग्निशमन विभाग में 178 और स्वास्थ्य सेवाओं में 100 नियमित पदों की स्थिति बताई गई है।
जल शक्ति विभाग में 50 और लोक निर्माण विभाग में 174 अनुबंध पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है। राज्य कर एवं आबकारी विभाग में 58 नियमित पदों की भर्ती भी विभिन्न चरणों में है। विधानसभा में दिए गए जवाब में सरकार ने इन पदों के साथ भर्ती परीक्षाओं के लिए तैयार तकनीकी ढांचे और परीक्षा संचालन एजेंसी की जवाबदेही से जुड़े प्रावधानों की जानकारी दी है।