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किशाऊ परियोजना पर अनुराग ठाकुर का दावा, केंद्र ने खत्म किया छह दशक पुराना गतिरोध

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 2 Hours Ago • 1 Min Read

किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर हमीरपुर के सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने छह दशक से लंबित मतभेदों का समाधान कराया है। उन्होंने कहा कि 15 सितंबर 2026 को छह सहभागी राज्यों ने परियोजना से जुड़े समझौते पर हस्ताक्षर किए। ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर इस सामूहिक निर्णय का राजनीतिक श्रेय लेने का आरोप लगाते हुए सभी पक्षों के योगदान को स्वीकार करने की बात कही।

शिमला

अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की पहल से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों के साथ चर्चा की गई। उनके अनुसार, इस संवाद के बाद परियोजना से जुड़े लंबे समय से लंबित मतभेदों पर सहमति बनी। उन्होंने समझौते में योगदान के लिए केंद्र सरकार और सभी सहभागी राज्यों के मुख्यमंत्रियों का आभार जताया।

केंद्र उठाएगा 90 प्रतिशत वित्तीय भार

ठाकुर ने बताया कि किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिया गया है। इसके लगभग 90 प्रतिशत वित्तीय भार का वहन केंद्र सरकार करेगी, जबकि शेष 10 प्रतिशत खर्च सहभागी राज्य उठाएंगे। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के हिस्से की विद्युत लागत का वित्तीय भार अन्य सहभागी राज्यों द्वारा साझा करने की व्यवस्था भी बनी है। केंद्र सरकार के अनुसार, परियोजना से करीब 97 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा देने और लगभग 1,476 मिलियन यूनिट स्वच्छ जलविद्युत उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्यमंत्री पर राजनीतिक श्रेय लेने का आरोप

अनुराग ठाकुर ने आरोप लगाया कि छह राज्यों के हितों से जुड़े समझौते को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू व्यक्तिगत राजनीतिक उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि परियोजना पर सहमति केंद्र और सहभागी राज्यों के संवाद से बनी है, इसलिए किसी एक पक्ष द्वारा इसका श्रेय लेना उचित नहीं है। ठाकुर ने इस समझौते को सहकारी संघवाद का उदाहरण बताते हुए कहा कि राजनीतिक श्रेय के बजाय हिमाचल प्रदेश, अन्य सहभागी राज्यों और आने वाली पीढ़ियों की जल एवं ऊर्जा जरूरतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

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