ऊना के ललड़ी पॉलीक्लीनिक में गाय के पेट से निकला 7 किलो प्लास्टिक, ऑपरेशन सफल
ऊना जिले के ललड़ी स्थित पशु चिकित्सालय में एक गाय का सफल ऑपरेशन कर उसके पेट से लगभग 7 किलोग्राम प्लास्टिक, दो पत्थर और तीन सिक्के निकाले गए। पशु चिकित्सा विभाग के अनुसार समय पर उपचार से गाय की स्थिति में सुधार हो रहा है और उसे निगरानी में रखा गया है।
ऊना
ललड़ी पॉलीक्लीनिक में किया गया विशेष शल्य उपचार
ऊना जिले की अंब तहसील के सोहारी गांव के पशुपालक मदन लाल की गाय को उपचार के लिए बहुआयामी पशु चिकित्सालय एवं पशु चिकित्सा पॉलीक्लीनिक ललड़ी लाया गया था। पशु पिछले रविवार से चारा नहीं खा रहा था और उसकी सामान्य गतिविधियां भी प्रभावित हो रही थीं। प्रारंभिक जांच के दौरान चिकित्सकों को पेट में बाहरी वस्तुओं के जमा होने की आशंका हुई, जिसके बाद विस्तृत परीक्षण कर शल्य चिकित्सा करने का निर्णय लिया गया।
ऑपरेशन के दौरान निकाली गई 7 किलोग्राम से अधिक सामग्री
डॉ. निशांत रनौत के नेतृत्व में किए गए ऑपरेशन के दौरान गाय के पेट से लगभग 7 किलोग्राम प्लास्टिक, दो पत्थर और तीन सिक्के निकाले गए। चिकित्सकों के अनुसार लंबे समय तक पेट में जमा यह सामग्री पाचन तंत्र को प्रभावित कर रही थी। ऑपरेशन टीम में डॉ. नवनीत शर्मा, डॉ. शिल्पा, फार्मासिस्ट सौरव कुमार तथा रीमा, सनंदा, राम प्रसाद, दीपक, सक्षम और विकास शामिल रहे। विभाग के अनुसार समय पर शल्य चिकित्सा किए जाने से पशु को आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जा सका।
ऑपरेशन के बाद स्वास्थ्य में सुधार
पशु चिकित्सा विभाग ने बताया कि ऑपरेशन के बाद गाय की स्थिति स्थिर है और उसमें सुधार दर्ज किया जा रहा है। चिकित्सकीय टीम लगातार उसकी निगरानी कर रही है तथा आवश्यक दवाएं और उपचार उपलब्ध कराए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकार के मामलों में समय पर पहचान और उपचार महत्वपूर्ण होता है।
खुले में फेंका गया प्लास्टिक पशुओं के लिए जोखिम
चिकित्सकों ने बताया कि खुले में फेंका गया प्लास्टिक अक्सर आवारा और खुले में चरने वाले पशुओं द्वारा निगल लिया जाता है, जिससे उनके पाचन तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। विभाग ने लोगों से प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट पदार्थों का वैज्ञानिक तरीके से निपटान करने की अपील की है ताकि पशुधन को ऐसे जोखिमों से बचाया जा सके।
उन्नत सुविधाओं से सुसज्जित है ललड़ी पशु चिकित्सालय
बहुआयामी पशु चिकित्सालय एवं पॉलीक्लीनिक ललड़ी में इकोकार्डियोग्राफी, इलास्टोग्राफी, अल्ट्रासाउंड, ऑर्थोपेडिक सर्जरी, नेत्र शल्य चिकित्सा, कार्डियक एवं थोरेसिक सर्जरी तथा सीज़ेरियन ऑपरेशन जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। संस्थान में लगभग 16 लाख रुपये की लागत से स्थापित आधुनिक अल्ट्रासाउंड मशीन के माध्यम से अब तक करीब 1000 पशुओं का परीक्षण और उपचार किया जा चुका है। इन सुविधाओं के कारण ऊना जिले के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों के पशुपालकों को भी स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं।
पशु चिकित्सा सेवाओं के विस्तार पर जोर
पशु चिकित्सा विभाग के अनुसार क्षेत्र में आधुनिक सुविधाओं और विशेषज्ञ स्टाफ की उपलब्धता बढ़ाने के प्रयास जारी हैं। इसी क्रम में हरोली पशु चिकित्सालय को उप-मंडलीय पशु चिकित्सालय का दर्जा प्रदान किया गया है, जिससे पशुपालकों को उपचार, टीकाकरण, रोग नियंत्रण और अन्य पशु स्वास्थ्य सेवाएं अपने क्षेत्र में ही उपलब्ध हो सकेंगी।