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मनरेगा कार्यों में 55 लाख रुपये की कथित अनियमितता, विजिलेंस ने वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों पर दर्ज की एफआईआर

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 1 Hour Ago • 1 Min Read

मनरेगा के तहत चंबा जिले में कराए गए विकास कार्यों में कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो (विजिलेंस) ने तत्कालीन वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि सरकारी रिकॉर्ड में फर्जी कार्य और सामग्री दर्शाकर करीब 55 लाख रुपये के सरकारी धन का कथित गबन और दुरुपयोग किया गया। मामले में विजिलेंस ने विभिन्न दस्तावेजों और प्रारंभिक जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

शिमला

विजिलेंस के अनुसार मामले में तत्कालीन रेंज एवं ब्लॉक अधिकारी, फॉरेस्ट गार्ड तथा अन्य संबंधित कर्मचारियों को नामजद किया गया है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 409, 420, 467, 468, 471 और 120-बी के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित-2018) की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। जांच एजेंसी भुगतान प्रक्रिया, सरकारी रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की विस्तृत जांच कर रही है।

शिकायतों के बाद शुरू हुई जांच

जानकारी के अनुसार वर्ष 2022 में प्राप्त दो शिकायतों के आधार पर इस मामले की जांच शुरू की गई। शिकायतें पूर्व जिला परिषद सदस्य कर्मचंद ठाकुर और अन्य ग्रामीणों की ओर से दी गई थीं। इससे पहले वर्ष 2019 में भी भारी बर्फबारी के बाद देवदार के पेड़ों के कथित अवैध कटान और मनरेगा कार्यों में अनियमितताओं को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके बाद उपायुक्त चंबा ने मामले की जांच जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) को सौंपी।

तकनीकी समिति की रिपोर्ट में सामने आईं अनियमितताएं

डीआरडीए की तकनीकी समिति ने वन परिक्षेत्र तीसा, मसरूंड और टिकरीगढ़ में मनरेगा के तहत कराए गए 41 कार्यों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान 32 कार्यों में गंभीर तकनीकी और वित्तीय अनियमितताएं सामने आने का दावा किया गया। रिपोर्ट के अनुसार कई स्थानों पर सामग्री मद में भुगतान तो दर्शाया गया, लेकिन मौके पर सामग्री का उपयोग नहीं मिला या वास्तविक कार्य रिकॉर्ड में दर्ज कार्यों से काफी कम पाया गया।

फर्जी रिकॉर्ड तैयार कर भुगतान लेने का आरोप

विजिलेंस का कहना है कि दस्तावेजों, तकनीकी मूल्यांकन रिपोर्ट और संबंधित अधिकारियों के बयानों के आधार पर प्रथम दृष्टया यह सामने आया है कि कथित रूप से आपराधिक षड्यंत्र के तहत वास्तविक कार्यों से अधिक कार्य और सामग्री दर्शाकर फर्जी रिकॉर्ड तैयार किए गए। इन्हीं अभिलेखों के आधार पर सरकारी भुगतान प्राप्त किए जाने का आरोप है। मामले में विजिलेंस की जांच जारी है।

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