समय सीमा खत्म होने के बावजूद ठेकेदार ने खाली नहीं की माल रोड की पार्किंग
सरकारी संपत्ति पर कंडम वाहनों का कब्जा, पार्किंग को तरसे लोग; खत्म हो चुके टेंडर के बाद भी वसूला जा रहा शुल्क?
नाहन
नाहन शहर में पार्किंग की समस्या अब केवल आम लोगों की परेशानी नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक सवाल बनती जा रही है। शहर में जहां वाहन खड़ा करने के लिए लोगों को जगह-जगह भटकना पड़ रहा है, वहीं लोगों की सुविधा के लिए बनाई गई माल रोड पार्किंग लंबे समय से कथित तौर पर कंडम वाहनों के कब्जे में है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि पार्किंग का ठेका 4 सितंबर को समाप्त हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद पार्किंग स्थल अभी तक खाली नहीं कराया जा सका।
यानी सवाल सिर्फ कंडम गाड़ियों के कब्जे का नहीं, बल्कि सरकारी संपत्ति पर प्रशासनिक आदेशों की प्रभावशीलता का भी है। यदि ठेके की अवधि समाप्त हो चुकी है तो फिर ठेकेदार किस अधिकार से पार्किंग स्थल का उपयोग कर रहा है और कथित तौर पर पार्किंग शुल्क की वसूली किस आधार पर की जा रही है?
नाहन नगर परिषद ने ठेकेदार को पार्किंग खाली करने के निर्देश तो दे दिए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह बताती है कि आदेशों का असर अभी तक दिखाई नहीं दे रहा। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर नगर परिषद के आदेशों को लागू करवाने में देरी क्यों हो रही है?
माल रोड की यह पार्किंग नाहन शहर के महत्वपूर्ण स्थलों में शामिल है। यहीं हिमाचल निर्माता डॉ. यशवंत सिंह परमार की प्रतिमा भी स्थापित है। मगर विडंबना यह है कि शहरवासियों और पर्यटकों के लिए बनाई गई पार्किंग में कई कंडम वाहन लंबे समय से खड़े हैं, जिसके चलते जरूरतमंद वाहन चालकों को पार्किंग की सुविधा नहीं मिल पा रही।
शहर की प्रबुद्ध जनता नगर परिषद और जिला प्रशासन से कई बार इस समस्या के समाधान की मांग कर चुकी है, लेकिन अब तक स्थिति जस की तस बनी हुई है। बाहर से आने वाले पर्यटकों को माल रोड क्षेत्र में पार्किंग न मिलने के कारण शहर में रुकने में परेशानी होती है। इसका सीधा असर स्थानीय बाजार और उन व्यापारियों की दुकानदारी पर भी पड़ता है, जिनका कारोबार पर्यटकों और बाहरी लोगों की आवाजाही से जुड़ा हुआ है।
अब सबसे अहम सवाल यह है कि 4 सितंबर के बाद यदि पार्किंग शुल्क की वसूली हुई है तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी? क्या नगर परिषद इस मामले की जांच कर समाप्त हो चुके ठेके की अवधि के बाद हुई वसूली का हिसाब लेगी और नियमानुसार कार्रवाई करेगी, या फिर मामला केवल चेतावनियों और आदेशों तक ही सीमित रह जाएगा?
उधर, नाहन नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी संजय कुमार ने बताया कि ठेकेदार को पार्किंग खाली करने के आदेश दिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि यदि इसके बावजूद पार्किंग खाली नहीं की गई है तो मामले में अगली कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने बताया कि पार्किंग का नया टेंडर भी जल्द लगाया जाएगा।
अब देखना यह होगा कि नगर परिषद के आदेश जमीन पर कितनी जल्दी उतरते हैं। क्योंकि नाहन की जनता के सामने सवाल बिल्कुल सीधा है—जब शहर में पार्किंग के लिए आम आदमी जगह तलाश रहा है, तो सरकारी पार्किंग में कंडम वाहनों का कब्जा आखिर कब तक बर्दाश्त किया जाएगा?