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NDPS / सोलन के नालागढ़ में चिट्टा बरामदगी मामले में दोषी को चार वर्ष कारावास की सजा

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन2 • 1 Hour Ago • 1 Min Read

NDPS : नालागढ़ की अदालत ने एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज चिट्टा बरामदगी मामले में दोषी को चार वर्ष के कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। यह मामला वर्ष 2019 में दर्ज किया गया था, जिसमें पुलिस ने वाहन जांच के दौरान 7.02 ग्राम चिट्टा (हेरोइन) बरामद किया था। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष गवाहों के बयान, जब्ती रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए।

नालागढ़

वर्ष 2019 में दर्ज हुआ था मामला

उप-जिला न्यायवादी संदीप शर्मा ने बताया कि यह मामला 18 अक्तूबर 2019 का है। उस समय एसआईयू के प्रभारी निरीक्षक जोगिंद्र सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम जोघो-स्वारघाट रोड पर ऊंटपुर गांव के समीप गश्त और नाकाबंदी पर तैनात थी। इसी दौरान स्वारघाट की ओर से आ रही एक मारुति कार को नियमित जांच के लिए रोका गया।

वाहन की तलाशी में बरामद हुआ मादक पदार्थ

पुलिस द्वारा वाहन की तलाशी लेने पर कार के डैशबोर्ड के अंदर रखे एक जिपनुमा लिफाफे से 7.02 ग्राम चिट्टा (हेरोइन) बरामद किया गया। बरामदगी के बाद पुलिस ने नियमानुसार मादक पदार्थ को कब्जे में लेकर जब्त किया और मामले की जांच शुरू की। इसके उपरांत पुलिस थाना नालागढ़ में एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आरोपी शेर सिंह को गिरफ्तार किया गया।

अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर सुनाया फैसला

मामले की सुनवाई अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंकज गुप्ता की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत गवाहों के बयान, दस्तावेजी रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया गया। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी शेर सिंह को दोषी करार दिया।

चार वर्ष की कैद और जुर्माने की सजा

अदालत ने दोषी को एनडीपीएस एक्ट की धारा 21 के तहत चार वर्ष के कारावास और 10,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। इसके अतिरिक्त मोटर वाहन अधिनियम की धारा 177 और 196 के तहत 100-100 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। न्यायालय के आदेश के अनुसार निर्धारित अवधि तक कारावास और जुर्माने की सजा लागू रहेगी।

एनडीपीएस मामलों में न्यायिक प्रक्रिया पूरी

यह मामला वर्ष 2019 में दर्ज हुआ था, जिसकी जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद अदालत ने अंतिम निर्णय सुनाया है। मामले में अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों को न्यायालय ने निर्णय का आधार माना और उसी के अनुसार दोषसिद्धि एवं सजा का आदेश पारित किया।

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