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नेपाल बाढ़: शव न मिलने पर कुश के पुतलों का अंतिम संस्कार कर रहे परिवार, 4,216 लोग लापता

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 21 Hours Ago • 1 Min Read

नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद हजारों परिवार अपने लापता परिजनों की तलाश कर रहे हैं। राहत शिविरों, अस्पतालों और शवगृहों में खोज के बावजूद कोई सुराग नहीं मिलने पर कुछ परिवार कुश घास से बने पुतलों को प्रतीक मानकर अंतिम संस्कार कर रहे हैं। नेपाल सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार 1,252 शव बरामद किए गए हैं, करीब 4,216 लोग अब भी लापता हैं और 11,993 लोगों को बचाया जा चुका है। तलाश और सत्यापन जारी रहने के कारण इन आंकड़ों में बदलाव हो सकता है।

काठमांडू

बाढ़ प्रभावित परिवारों का दुख काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर में भी दिखाई दे रहा है। जिन लोगों के शव नहीं मिल सके, उनके परिजन हिंदू परंपराओं के अनुसार कुश घास और अन्य सामग्री से प्रतीकात्मक शरीर बनाकर अंतिम संस्कार कर रहे हैं। कई परिवारों के लिए यह निर्णय कठिन है, क्योंकि उन्हें अब भी अपने लापता सदस्य के लौटने की उम्मीद है। इसके बावजूद पारंपरिक अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी पूरी करने के लिए वे इस प्रतीकात्मक विधि का सहारा ले रहे हैं।

12 वर्षीय रोजेल ने पिता के प्रतीक पुतले को दी मुखाग्नि

इन्हीं परिवारों में 12 वर्षीय रोजेल श्रेष्ठ का परिवार भी शामिल है। रोजेल ने पशुपतिनाथ मंदिर में अपने लापता पिता का प्रतीक मानकर घास और जौ से तैयार छोटे पुतले को मुखाग्नि दी। उनके 37 वर्षीय पिता कृष्ण श्रेष्ठ बाढ़ के समय गंभीर रूप से प्रभावित रसुवा जिले में थे और उसके बाद से उनका कोई पता नहीं चला। परिवार ने विभिन्न स्थानों और शवगृहों में उनकी तलाश की, लेकिन जानकारी नहीं मिलने के बाद पारंपरिक रीति से प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया।

आखिरी फोन के बाद नहीं मिला ट्रक चालक का सुराग

35 वर्षीय ट्रक चालक चंद्र बहादुर नेवार के परिवार ने भी प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार किया। वह चीन की ओर जाते समय नेपाल के सीमावर्ती शहर तिमुरे में थे। बाढ़ आने से पहले उन्होंने परिवार से फोन पर बात की थी और जल्द घर लौटने की जानकारी दी थी। अगली सुबह संपर्क नहीं होने और बाढ़ की खबर मिलने के बाद परिवार ने उनकी तलाश शुरू की। आपदा प्रभावित क्षेत्रों से लेकर नदी के निचले हिस्सों तक खोज करने के बावजूद उनका कोई सुराग नहीं मिला।

तलाश और बचाव अभियान जारी

नेपाल के विदेश मंत्रालय की ताजा जानकारी के अनुसार करीब 4,216 लोग अब भी लापता हैं, जबकि 11,993 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। लापता लोगों में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। राहत और बचाव दल बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के साथ जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में भी तलाश कर रहे हैं, जहां कई लोगों के फंसे होने की आशंका है। लापता लोगों की खोज और उपलब्ध सूचनाओं के सत्यापन का काम लगातार जारी है।

बाढ़ के नौ दिन बाद अपर त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग से दो कर्मचारियों को जीवित निकाला गया है। बचाव एजेंसियों को आशंका है कि कुछ अन्य लोग भी सुरंगों के भीतर सुरक्षित स्थानों पर जीवित हो सकते हैं। इसी संभावना के आधार पर प्रभावित जलविद्युत परियोजनाओं में खोज अभियान चलाया जा रहा है। दूसरी ओर, लापता परिजनों की स्थिति स्पष्ट नहीं होने से परिवार अनिश्चितता में हैं और कुछ परिवार परंपरा के अनुसार प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार कर रहे हैं।

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