एनएच-07 के 60 किलोमीटर पर गड्ढों का राज, ट्रांसफर-टेकओवर के फेर में फंसी सड़क
हरियाणा और उत्तराखंड में फोरलेन चकाचक, हिमाचल के हिस्से में हादसों का खतरा; दशहरे के अगले दिन से मेंटेनेंस का दावा, आगे नए सिरे से फोरलेन की टेंडर प्रक्रिया
कालाअंब
नेशनल हाईवे-07 पर कालाअंब से पांवटा साहिब तक करीब 60 किलोमीटर का सफर इन दिनों वाहन चालकों के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। सड़क पर जगह-जगह बने गहरे गड्ढे, उनसे बचने के लिए वाहनों की जद्दोजहद और हर वक्त दुर्घटना का मंडराता खतरा इस महत्वपूर्ण हाईवे की बदहाली की कहानी बयां कर रहा है। विडंबना यह है कि जिस सड़क को लोगों के लिए सुरक्षित और सुगम यातायात का माध्यम होना चाहिए, वही अब वाहनों और वाहन चालकों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। सड़क की बदहाली पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जिम्मेदारी किसकी है? भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को हस्तांतरण की प्रक्रिया के बीच फंसे इस मार्ग की हालत ऐसी हो गई है कि यहां गड्ढे भरने के बजाय कई जगह गड्ढे खाइयों का रूप लेते नजर आ रहे हैं।
ट्रांसफर हुआ, टेकओवर नहीं; भुगत रही जनता
कालाअंब से पांवटा साहिब तक का यह करीब 60 किलोमीटर लंबा हिस्सा पहले हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग के राष्ट्रीय राजमार्ग मंडल के अधीन था। हाल ही में इसे सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (मोर्थ) से एनएचएआई को हस्तांतरित किया गया है, लेकिन हस्तांतरण के बाद टेकओवर की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। नतीजा यह है कि सड़क की बदहाली के बीच आम लोगों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। हालात ऐसे हैं कि शायद ही इस पूरे मार्ग पर कोई ऐसा हिस्सा मिले, जहां सड़क पूरी तरह गड्ढामुक्त नजर आए। रोजाना इस हाईवे से गुजरने वाले वाहन चालकों को न केवल सफर में अतिरिक्त समय गंवाना पड़ रहा है, बल्कि वाहनों के टायर, सस्पेंशन और अन्य पुर्जों को नुकसान पहुंचने का खतरा भी बना हुआ है। स्थानीय स्तर पर लगातार हादसों और वाहनों के खराब होने की शिकायतें इस मार्ग की तत्काल मरम्मत की जरूरत को रेखांकित करती हैं।

विडंबना देखिए कि हिमाचल से सटे हरियाणा और उत्तराखंड की ओर हाईवे के हिस्सों पर फोरलेन सड़क का निर्माण हो चुका है, जबकि हिमाचल के बीच से गुजरने वाला यह महत्वपूर्ण हिस्सा बदहाली से जूझ रहा है। ऐसे में सवाल केवल सड़क की मरम्मत का नहीं, बल्कि प्रदेश से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव और जवाबदेही का भी है।
दशहरे के अगले दिन से मरम्मत का दावा, फोरलेन के लिए होगी नई टेंडर प्रक्रिया
हालांकि, इस बदहाल सड़क से गुजरने वाले लोगों के लिए राहत की खबर भी सामने आई है। एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर आनंद धैया ने बताया कि हैंडओवर और टेकओवर की प्रक्रिया अपनी जगह चलती रहेगी, लेकिन आम लोगों को परेशानी न हो, इसके लिए फिलहाल सड़क की मेंटेनेंस का जिम्मा एक अन्य राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में लगी एजेंसी को सौंपा गया है। उन्होंने बताया कि दशहरे के अगले दिन से इस 60 किलोमीटर लंबे मार्ग पर मरम्मत और रखरखाव का काम शुरू कर दिया जाएगा।
प्रोजेक्ट डायरेक्टर के अनुसार, टेकओवर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस मार्ग को नए सिरे से फोरलेन में विकसित करने के लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी। उन्होंने जल्द ही इस दिशा में काम आगे बढ़ाने की बात कही।
फिलहाल सबसे बड़ी जरूरत यह है कि मरम्मत का काम केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए। सड़क के गहरे गड्ढों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जाए और खतरनाक स्थानों को सुरक्षित बनाया जाए, ताकि फोरलेन निर्माण की प्रक्रिया पूरी होने तक लोगों को जोखिम भरे सफर से राहत मिल सके। क्योंकि सरकारी फाइलों में जिम्मेदारी का हस्तांतरण अपनी गति से चलता रहेगा, लेकिन सड़क पर सफर करने वाले लोगों की सुरक्षा इंतजार नहीं कर सकती।