Outsource Employee / IGMC में कर्मियों का प्रदर्शन, 24 अगस्त को एक दिन की हड़ताल का ऐलान
Outsource Employee / शिमला के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज में आउटसोर्स और ठेका कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने ईपीएफ, ईएसआई, वेतन और स्थायी रोजगार सहित विभिन्न मुद्दे उठाते हुए मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में 24 अगस्त को एक दिन की हड़ताल करने का ऐलान किया है।
शिमला
आईजीएमसी में कार्यरत आउटसोर्स और ठेका कर्मचारियों ने शुक्रवार को अस्पताल के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन किया। इसमें सीटू के प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, जिला महासचिव अमित कुमार और बड़ी संख्या में कर्मचारी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अस्पताल के संचालन में आउटसोर्स और ठेका कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन उन्हें कई बुनियादी एवं वैधानिक सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। उन्होंने सम्मानजनक वेतन, सामाजिक सुरक्षा, सुरक्षित कार्यस्थल और स्थायी रोजगार की व्यवस्था करने की मांग उठाई।
ईपीएफ, ईएसआई और अन्य सुविधाओं की मांग
मजदूर नेताओं ने कर्मचारियों को ईपीएफ, ईएसआई, बोनस, ओवरटाइम, यूनिफॉर्म, पहचान पत्र, वेतन पर्ची और चेंजिंग रूम की सुविधा देने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षा कर्मचारियों के वेतन से ईपीएफ की राशि काटे जाने के बावजूद जनवरी 2026 के बाद इसे जमा नहीं किया गया। कर्मचारियों के अनुसार, उन्हें पिछले तीन वर्षों से यूनिफॉर्म भी उपलब्ध नहीं करवाई गई है और अस्पताल परिसर में उचित चेंजिंग रूम की व्यवस्था नहीं है।
कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने आईजीएमसी में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की मांग करते हुए कहा कि कम स्टाफ के कारण एक कर्मचारी से कई तरह के काम लिए जा रहे हैं। इससे काम का बोझ बढ़ने के साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है। मजदूर नेताओं ने कहा कि अस्पताल जैसे संवेदनशील संस्थान में मरीजों की सेवाओं के लिए पर्याप्त कर्मचारी जरूरी हैं। उन्होंने जॉब ट्रेनी, रोगी मित्र और मल्टी टास्क वर्कर जैसी अस्थायी व्यवस्थाओं के स्थान पर स्थायी रोजगार नीति बनाने की मांग भी की।
24 अगस्त को हड़ताल का ऐलान
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने कहा कि मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन आगे बढ़ाया जाएगा। इसी क्रम में आईजीएमसी के कर्मचारियों ने 24 अगस्त को एक दिन की हड़ताल करने की घोषणा की। मजदूर नेताओं के अनुसार, उनका संघर्ष अस्पताल या मरीजों के खिलाफ नहीं, बल्कि कर्मचारियों के अधिकारों और बेहतर कार्य परिस्थितियों के लिए है। उन्होंने अस्पताल की सफाई, सुरक्षा और अन्य आवश्यक सेवाएं देने वाले कर्मचारियों को सम्मानजनक वेतन, सामाजिक सुरक्षा और स्थायी रोजगार देने की मांग दोहराई।
