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पिंजौर-नालागढ़ के निर्माणाधीन फोरलेन की गुणवत्ता और निर्माण पद्धति पर समाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियरों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि निर्माण कर रही कंपनी ने एनएचएआई द्वारा तय किए गए मानकों का पालन नहीं किया।

समाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर नरेश मेहता ने बद्दी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि जहां सड़क का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, वहां दरारें आनी शुरू हो गई हैं। कई स्थानों पर स्थानीय गांवों को जाने वाले रास्ते 10 से 15 फीट गहरे हो गए हैं, जिसके कारण रोजाना दुर्घटनाएं हो रही हैं।

नरेश मेहता ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण कार्य कर रही कंपनी ने 50 करोड़ के निर्धारित टेंडर को महज 4469 करोड़ में हासिल किया था, और अब यह काम पूरा नहीं हो पाया। इसलिए इस परियोजना को एक अन्य कंपनी को सौंपा जा रहा है। उन्होंने कहा कि घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है।

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इस मामले में नरेश मेहता ने केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को एक शिकायत पत्र भेजकर फोरलेन निर्माण कार्य की जांच की मांग की है।

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