पटना पुलिस ने हाल ही में जन सुराज प्रमुख प्रशांत किशोर को गिरफ्तार कर लिया, और गांधी मैदान को खाली करा लिया, जहां वे बीपीएससी परीक्षा में धांधली और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे। यह घटना राजनीति और प्रशासनिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह विरोध और लोकतांत्रिक अधिकारों पर एक नई बहस को जन्म देती है।
गांधी मैदान में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल
प्रशांत किशोर, जो जन सुराज पार्टी के संस्थापक हैं, ने गांधी मैदान में बीपीएससी परीक्षा में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। उनका यह आंदोलन शिक्षा क्षेत्र में सुधार की मांग के साथ था, और उन्होंने राज्य सरकार से पांच प्रमुख मुद्दों पर कार्रवाई की मांग की थी।
लेकिन, 6 जनवरी 2025 को पटना पुलिस ने अचानक कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया और गांधी मैदान को खाली करा लिया। पुलिस का कहना है कि प्रशांत किशोर और उनके समर्थक गांधी मैदान में अवैध रूप से धरना दे रहे थे, जिसके बाद उन्हें कानून के तहत गिरफ्तार किया गया।
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पुलिस की कार्रवाई: थप्पड़ और गिरफ्तारी
जन सुराज पार्टी ने पुलिस की कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी की ओर से जारी एक प्रेस रिलीज में दावा किया गया कि पुलिस ने प्रशांत किशोर को जबरन अस्पताल ले जाते हुए थप्पड़ मारे। जन सुराज के अनुसार, पुलिस ने उन्हें एम्स अस्पताल भेजा, लेकिन उन्होंने इलाज कराने से मना कर दिया और अपना अनशन जारी रखा।
इस घटना के बाद, पुलिस ने गांधी मैदान क्षेत्र को पूरी तरह से खाली करवा दिया और वहां से सभी वाहनों की जांच की। किसी को भी गांधी मैदान में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई।
सोशल मीडिया पर विरोध
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (Twitter) पर जन सुराज पार्टी ने इस मुद्दे को उजागर करते हुए एक पोस्ट किया। पार्टी ने लिखा, “नीतीश कुमार की कायरता देखिए, उनकी पुलिस ने पिछले 5 दिनों से शिक्षा और भ्रष्ट परीक्षा के खिलाफ आमरण अनशन कर रहे प्रशांत किशोर को रात 4 बजे जबरन हिरासत में लिया। साथ में बैठे हजारों युवाओं को अज्ञात स्थान पर ले गई।”
इस पोस्ट में पार्टी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की आलोचना करते हुए इस कार्रवाई को उनके प्रशासनिक असफलता के रूप में चित्रित किया।
प्रशासन की तरफ से बयान
पटना जिला प्रशासन ने इस घटना को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। प्रशासन का कहना है कि प्रशांत किशोर और उनके समर्थकों द्वारा गांधी मैदान में अवैध रूप से धरना दिया जा रहा था, जो कि एक प्रतिबंधित क्षेत्र है। प्रशासन ने पहले ही इनसे प्रदर्शन स्थल बदलने के लिए नोटिस जारी किया था, लेकिन प्रदर्शनकारी वहां से हटने को तैयार नहीं हुए।
आखिरकार, पुलिस ने कार्रवाई की और प्रशांत किशोर को गिरफ्तार कर लिया। प्रशासन के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए सभी लोग पूरी तरह से स्वस्थ हैं और उन्हें कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा।
कोर्ट में पेशी और आगे की रणनीति
प्रशांत किशोर के गिरफ्तारी के बाद, जन सुराज पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी मांगों को कानूनी तरीके से जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि वे 7 जनवरी 2025 को उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करेंगे। उनका कहना था कि उनकी लड़ाई अब भी जारी रहेगी, और उनका उद्देश्य बीपीएससी परीक्षा को रद्द कराना और शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाना है।
निष्कर्ष
प्रशांत किशोर की गिरफ्तारी और गांधी मैदान से पुलिस की कार्रवाई ने बिहार की राजनीति और प्रशासन में हलचल मचा दी है। यह घटनाक्रम न केवल शिक्षा व्यवस्था के मुद्दे को फिर से सामने लाता है, बल्कि लोकतांत्रिक आंदोलनों पर पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल खड़ा करता है। अब देखना यह होगा कि यह आंदोलन आगे किस दिशा में जाएगा और बिहार सरकार इस मामले पर किस प्रकार की प्रतिक्रिया देती है।
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