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बच्चों को निमोनिया के लिए लगने वाली वैक्सीन न्यूमोकोकल और पेंटावेलेंट के सैंपल हुए फेल

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन2 • 1 Hour Ago • 1 Min Read

Himachalnow / सोलन

केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला (सीडीएल) कसौली में जांच के दौरान बच्चों के टीकाकरण में उपयोग होने वाली न्यूमोकोकल और पैंटावैलेंट वैक्सीन के सैंपल निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। जांच रिपोर्ट में दोनों वैक्सीन सैंपलों को ‘नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी’ श्रेणी में रखा गया है। जानकारी के अनुसार ये सैंपल फील्ड से लिए गए थे और परीक्षण के दौरान इनमें फिजिकल आस्पेक्ट्स से संबंधित कमियां पाई गईं।

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सीडीएल कसौली ने जारी की वैक्सीन जांच रिपोर्ट

केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला (सीडीएल) कसौली द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट में बच्चों के टीकाकरण में उपयोग होने वाली दो वैक्सीन के सैंपल फेल पाए गए हैं। जानकारी के अनुसार न्यूमोकोकल वैक्सीन और पैंटावैलेंट वैक्सीन के फील्ड सैंपलों की जांच सीडीएल कसौली में की गई थी। परीक्षण के दौरान दोनों सैंपल निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे, जिसके बाद इन्हें ‘नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी’ श्रेणी में रखा गया है। सीडीएल ने संबंधित रिपोर्ट अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर भी अपलोड कर दी है।

बच्चों के टीकाकरण में उपयोग होती हैं दोनों वैक्सीन

न्यूमोकोकल वैक्सीन का उपयोग बच्चों को निमोनिया जैसी बीमारियों से बचाव के लिए किया जाता है। वहीं पैंटावैलेंट वैक्सीन बच्चों को काली खांसी, हेपेटाइटिस-बी और दिमागी बुखार समेत कई बीमारियों से सुरक्षा देने के लिए टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल की जाती है। पैंटावैलेंट वैक्सीन डीटीडब्ल्यू, एचईपीबी और एचआईबी (पीआरपीटीटी) सहित पांच वैक्सीन के संयोजन से तैयार की जाती है। रिपोर्ट के अनुसार इन दोनों वैक्सीन के सैंपल जांच के दौरान निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए।

फिजिकल आस्पेक्ट्स में कमी का उल्लेख

जांच रिपोर्ट में इन वैक्सीन सैंपलों के फेल होने के पीछे ‘फिजिकल आस्पेक्ट्स’ में कमी का उल्लेख किया गया है। अधिकारियों के अनुसार इस वर्ष जांच के लिए आए फील्ड सैंपलों में ये दो वैक्सीन परीक्षण में सफल नहीं रहीं। प्रयोगशाला द्वारा संबंधित सैंपलों का तकनीकी परीक्षण निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया गया था।

बाजार में भेजने से पहले होती है गुणवत्ता जांच

सीडीएल कसौली में देशभर में तैयार और आयात की जाने वाली वैक्सीनों की गुणवत्ता जांच की जाती है। निर्धारित मानकों पर सही पाए जाने के बाद ही वैक्सीन को बाजार और टीकाकरण कार्यक्रमों के लिए अनुमति दी जाती है। यदि किसी सैंपल या बैच में गुणवत्ता संबंधी कमी पाई जाती है तो संबंधित स्तर पर आगे की कार्रवाई भी की जाती है। फिलहाल संबंधित वैक्सीन सैंपलों की रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी गई है।

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