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POCSO / किन्नौर पोक्सो मामले में अदालत का फैसला, आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 1 Hour Ago • 1 Min Read

POCSO : किन्नौर से जुड़े एक पोक्सो मामले में रामपुर स्थित विशेष अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों, चिकित्सकीय रिपोर्ट और डीएनए जांच परिणामों के आधार पर यह निर्णय दिया।

किन्नौर

पोक्सो कोर्ट ने सुनाया फैसला

अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय (पोक्सो कोर्ट) किन्नौर स्थित रामपुर की अदालत ने बुधवार को आरोपी ललित मोहन (32) निवासी तहसील कल्पा, जिला किन्नौर को 20 वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों के बयान, चिकित्सकीय रिपोर्ट और वैज्ञानिक परीक्षणों का विस्तृत परीक्षण किया गया। विशेष न्यायालय ने उपलब्ध रिकॉर्ड, जांच सामग्री और डीएनए रिपोर्ट के आधार पर निर्णय सुनाया।

वर्ष 2022 की घटना से जुड़ा मामला

अभियोजन पक्ष के अनुसार यह मामला वर्ष 2022 की घटना से संबंधित है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान पीड़िता के बयान दर्ज किए गए, चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया और संबंधित दस्तावेज एकत्र किए गए। रिकॉर्ड के अनुसार पीड़िता उस समय 14 वर्ष की थी और 9वीं कक्षा में पढ़ रही थी। बाद में दिसंबर 2022 में उसके पेट में दर्द की शिकायत पर अस्पताल में जांच कराई गई, जहां प्रैग्नेंसी टेस्ट पॉजिटिव पाया गया। इसके बाद चिकित्सक ने पुलिस को सूचना दी और थाना रिकांगपिओ में मामला दर्ज किया गया।

डीएनए रिपोर्ट को बनाया गया साक्ष्य का आधार

अदालत में प्रस्तुत रिकॉर्ड के अनुसार जांच के दौरान प्राप्त डीएनए रिपोर्ट में आरोपी की पुष्टि हुई। अभियोजन पक्ष ने बताया कि पीड़िता के पेट में पाए गए भ्रूण के जैविक पिता की पहचान डीएनए परीक्षण से आरोपी के रूप में हुई। इसके साथ ही चिकित्सकीय रिपोर्ट, बयान और अन्य दस्तावेजी साक्ष्य भी अदालत के समक्ष रखे गए। सुनवाई के दौरान इन सभी साक्ष्यों का परीक्षण किया गया और वैज्ञानिक रिपोर्ट को मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना गया।

अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर सुनाया निर्णय

अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान और डीएनए रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद आरोपी को दोषी पाया। इसके बाद अदालत ने आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। न्यायालय ने मामले में प्रस्तुत वैज्ञानिक और दस्तावेजी साक्ष्यों को निर्णय का आधार बनाया। अदालत के आदेश के अनुसार दोषसिद्धि के बाद सजा का प्रावधान लागू किया गया।

सरकार की ओर से की गई पैरवी

मामले में सरकार की ओर से उप-जिला न्यायवादी कमल चंदेल ने पैरवी की। अभियोजन पक्ष ने जांच से संबंधित साक्ष्य, चिकित्सकीय रिपोर्ट, बयान और डीएनए परीक्षण रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत की। इन्हीं तथ्यों के आधार पर विशेष अदालत ने अपना फैसला सुनाया। मामले की जांच और अभियोजन प्रक्रिया में दर्ज तथ्यों, चिकित्सकीय परीक्षण और वैज्ञानिक साक्ष्यों को अदालत ने निर्णायक माना।

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