वैक्सीन, कैंसर और एंटीबायोटिक दवाओं पर QR Code होगा अनिवार्य, मोबाइल से होगी दवा की पूरी जानकारी
केंद्र सरकार ने गंभीर बीमारियों के उपचार में उपयोग होने वाली चुनिंदा दवाओं पर क्यूआर कोड आधारित ट्रैक एंड ट्रेस प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था का उद्देश्य दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता बढ़ाना और उत्पाद की प्रामाणिकता का सत्यापन आसान बनाना है।
बीबीएन
औषधि नियमों में संशोधन, शेड्यूल एच-2 का दायरा बढ़ा
देश में दवाओं की गुणवत्ता, प्रामाणिकता और आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी को मजबूत बनाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने औषधि नियम, 1945 में संशोधन करते हुए शेड्यूल एच-2 का दायरा बढ़ा दिया है। इसके तहत सभी टीकों, जीवाणुरोधी (एंटीमाइक्रोबियल) दवाओं, कैंसर रोधी दवाओं तथा एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के तहत सूचीबद्ध मादक एवं मनरूप्रभावी दवाओं पर बारकोड अथवा क्यूआर कोड आधारित ट्रैक एंड ट्रेस प्रणाली लागू की जाएगी। सरकार का उद्देश्य निर्माण इकाई से लेकर मरीज तक पहुंचने वाली पूरी आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाना और दवाओं की प्रामाणिकता का सत्यापन आसान करना है।
दो चरणों में लागू होगी नई व्यवस्था
स्वास्थ्य मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार सभी टीकों, कैंसर रोधी दवाओं और एनडीपीएस अधिनियम के तहत आने वाली दवाओं पर 1 जुलाई 2027 से क्यूआर कोड अनिवार्य होगा। वहीं सभी जीवाणुरोधी (एंटीमाइक्रोबियल) दवाओं के लिए यह व्यवस्था 1 जुलाई 2028 से प्रभावी होगी। नई प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का उद्देश्य दवा निर्माता कंपनियों और अन्य हितधारकों को आवश्यक तकनीकी तैयारियां पूरी करने, पैकेजिंग में बदलाव करने तथा डिजिटल ट्रैकिंग व्यवस्था विकसित करने के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध कराना है।
प्राथमिक पैकेजिंग पर अनिवार्य होगा QR Code
नई व्यवस्था के तहत संबंधित दवा निर्माताओं को उत्पाद की प्राथमिक पैकेजिंग पर बारकोड अथवा क्यूआर कोड अंकित करना अनिवार्य होगा। यदि पैकेजिंग पर पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं है, तो क्यूआर कोड को द्वितीयक पैकेजिंग पर भी लगाया जा सकेगा। यह क्यूआर कोड केवल दवा की पहचान का माध्यम नहीं होगा, बल्कि इसके माध्यम से दवा से जुड़ी विस्तृत डिजिटल जानकारी भी उपलब्ध होगी, जिससे उपभोक्ताओं, फार्मासिस्ट और नियामक एजेंसियों के लिए उत्पाद का सत्यापन आसान हो सकेगा।
स्कैन करते ही मिलेगी दवा की पूरी जानकारी
क्यूआर कोड स्कैन करने पर दवा का विशिष्ट उत्पाद पहचान कोड (Unique Product Identification), जेनेरिक एवं ब्रांड नाम, निर्माता कंपनी का नाम और पता, बैच नंबर, निर्माण तिथि, एक्सपायरी तिथि, विनिर्माण लाइसेंस नंबर तथा जहां लागू हो वहां सहायक पदार्थों (Excipients) का विवरण उपलब्ध होगा। इस डिजिटल जानकारी के माध्यम से संबंधित बैच की पहचान, दवा की प्रामाणिकता का सत्यापन तथा आवश्यकता पड़ने पर उत्पाद की निगरानी और ट्रैकिंग अधिक व्यवस्थित तरीके से की जा सकेगी।
उद्योग जगत को तैयारी के लिए मिला समय
नई व्यवस्था को लागू करने के लिए केंद्र सरकार ने दवा कंपनियों और अन्य हितधारकों को पर्याप्त समय दिया है। इसके तहत 1 जुलाई 2027 से टीकों, कैंसर रोधी तथा एनडीपीएस अधिनियम के तहत आने वाली दवाओं पर क्यूआर कोड आधारित व्यवस्था लागू होगी, जबकि 1 जुलाई 2028 से सभी जीवाणुरोधी दवाओं के लिए यह नियम प्रभावी होगा। सरकार का मानना है कि चरणबद्ध क्रियान्वयन से उद्योग जगत नई प्रणाली को अपनाने, डिजिटल ट्रैकिंग तंत्र विकसित करने और आवश्यक तकनीकी तैयारियां पूरी करने में सक्षम होगा।
स्कैन करने पर उपलब्ध होगी यह जानकारी
क्यूआर कोड स्कैन करने पर दवा से संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त होंगी। इनमें विशिष्ट उत्पाद पहचान कोड, जेनेरिक एवं ब्रांड नाम, निर्माता का नाम और पता, बैच नंबर, निर्माण तिथि, एक्सपायरी तिथि, विनिर्माण लाइसेंस नंबर तथा जहां लागू हो वहां सहायक पदार्थों का विवरण शामिल होगा। इससे उत्पाद की पहचान और सत्यापन की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी।
ये है शेड्यूल एच-2
औषधि नियम, 1945 की शेड्यूल एच-2 के तहत अधिसूचित दवाओं पर बारकोड अथवा क्यूआर कोड आधारित ट्रैक एंड ट्रेस प्रणाली लागू की जाती है। इसका उद्देश्य दवा की निर्माण इकाई से लेकर अंतिम उपभोक्ता तक उसकी पहचान, आवाजाही और प्रामाणिकता सुनिश्चित करना है, ताकि दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी मजबूत हो और गुणवत्ता संबंधी नियंत्रण अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सके।