शिमला में नीट समेत राष्ट्रीय परीक्षाओं की अनियमितताओं के विरोध में एसएफआई का प्रदर्शन, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं और परीक्षा संचालन से जुड़े मुद्दों को लेकर एसएफआई की हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी ने शिमला में प्रदर्शन किया। संगठन ने एनटीए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए परीक्षा प्रणाली में सुधार, पारदर्शिता बढ़ाने तथा विभिन्न मांगों को लेकर विरोध दर्ज कराया और संबंधित अधिकारियों के माध्यम से ज्ञापन भी सौंपा।
शिमला
उपायुक्त कार्यालय के समीप किया प्रदर्शन
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी ने गुरुवार को शिमला में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली और विभिन्न राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन किया। उपायुक्त कार्यालय के समीप आयोजित इस कार्यक्रम में संगठन के कार्यकर्ताओं और छात्र प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सामूहिक गिरफ्तारियां देकर अपना विरोध दर्ज कराया और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग उठाई। संगठन का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं से हर वर्ष लाखों विद्यार्थी जुड़े होते हैं, ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता का व्यापक प्रभाव पड़ता है।
परीक्षा संचालन को लेकर उठाए सवाल
प्रदर्शन के दौरान एसएफआई ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी परीक्षा संचालन में अपेक्षित पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने में सफल नहीं रही है। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में पेपर लीक, परीक्षा स्थगित होने, परीक्षा रद्द होने और तकनीकी समस्याओं से जुड़े कई मामले सामने आए हैं। एसएफआई के अनुसार इन घटनाओं ने राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की प्रक्रिया और प्रबंधन को लेकर विद्यार्थियों तथा अभिभावकों के बीच कई सवाल खड़े किए हैं। संगठन ने कहा कि परीक्षा संचालन से जुड़े तंत्र को अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचा जा सके।
विद्यार्थियों पर प्रभाव का किया उल्लेख
संगठन का कहना है कि इन घटनाओं का प्रभाव देशभर के विद्यार्थियों पर पड़ा है। एसएफआई ने नीट-यूजी, यूजीसी-नेट, सीयूईटी और अन्य परीक्षाओं से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन परीक्षाओं में हर वर्ष लाखों अभ्यर्थी भाग लेते हैं और उनकी उच्च शिक्षा तथा करियर की योजनाएं इन परीक्षाओं के परिणामों पर निर्भर करती हैं। संगठन के अनुसार जब किसी परीक्षा में अनियमितता, तकनीकी गड़बड़ी या प्रशासनिक समस्या सामने आती है तो विद्यार्थियों को अतिरिक्त तैयारी, समय और आर्थिक संसाधनों का बोझ उठाना पड़ता है। एसएफआई ने कहा कि बार-बार सामने आ रही समस्याएं परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की आवश्यकता को दर्शाती हैं।
परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग
एसएफआई ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सुधार किए जाने चाहिए। संगठन ने केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से परीक्षा प्रक्रिया को अधिक भरोसेमंद बनाने के लिए ठोस नीतिगत कदम उठाने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि परीक्षा प्रबंधन, प्रश्नपत्र सुरक्षा, तकनीकी ढांचे और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि विद्यार्थियों को निष्पक्ष अवसर उपलब्ध कराया जा सके। संगठन का मानना है कि समयबद्ध और प्रभावी सुधारों से परीक्षा प्रणाली में विश्वास को मजबूत किया जा सकता है।
एनटीए से संबंधित कई मांगें उठाईं
प्रदर्शन के दौरान एसएफआई ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को समाप्त करने, परीक्षाओं के विकेंद्रीकरण, परीक्षा संबंधी अनियमितताओं की स्वतंत्र न्यायिक जांच तथा दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई। संगठन ने कहा कि परीक्षा प्रणाली से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। इसके साथ ही प्रभावित विद्यार्थियों को राहत और मुआवजा प्रदान करने की मांग भी की गई। एसएफआई का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में सुधार और पारदर्शिता सुनिश्चित करना देशभर के विद्यार्थियों के हित में आवश्यक है।