शिमला में 32 शिक्षकों को राज्य शिक्षक पुरस्कार, वंदेमातरम की विशेष प्रस्तुति से सजा समारोह
शिमला के लोकभवन में शिक्षक दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने स्कूल, उच्च और तकनीकी शिक्षा विभाग के कुल 32 शिक्षकों को राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया। समारोह की शुरुआत और समापन राष्ट्रगीत वंदेमातरम के सभी छंदों की विशेष प्रस्तुति से हुआ। आयोजन में हिमाचल की शिक्षा व्यवस्था, उसके भविष्य और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य में शिक्षकों की भूमिका पर भी चर्चा की गई।
शिमला/शिमला
समारोह में राष्ट्रगीत के साथ राष्ट्रगान की धुन भी बजाई गई। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू अन्य सरकारी कार्यक्रमों में व्यस्त होने के कारण कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर और तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने शिक्षा क्षेत्र में प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं और उपलब्धियों का उल्लेख किया। सम्मान पाने वालों में स्कूल शिक्षा विभाग के 21, उच्च शिक्षा विभाग के पांच और तकनीकी शिक्षा विभाग के पांच शिक्षक शामिल रहे। वर्ष 2025 के लिए चयनित सोलन के शिक्षक शशि पाल को भी राज्य शिक्षक पुरस्कार प्रदान किया गया।
शिक्षकों की भूमिका को बताया महत्वपूर्ण
राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यपुस्तकों का ज्ञान देने वाले कर्मी नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के भविष्य के निर्माता हैं। विकसित भारत-2047 की परिकल्पना को साकार करने में उनकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश का भविष्य कक्षाओं में आकार लेता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा तेजी से डिजिटल और तकनीक आधारित हो रही है, लेकिन इससे शिक्षक की भूमिका कम नहीं हुई। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म सीखने की प्रक्रिया आसान कर सकते हैं, पर शिक्षक के मार्गदर्शन, प्रेरणा, नैतिकता और मानवीय संवेदनाओं का स्थान नहीं ले सकते।
राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने शिक्षा को परीक्षा और डिग्री तक सीमित रखने के बजाय कौशल विकास, नवाचार, अनुसंधान, रचनात्मक सोच और चरित्र निर्माण से जोड़ा है। उन्होंने सम्मानित शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि यह पुरस्कार उनकी वर्षों की मेहनत, समर्पण और नवाचार का सम्मान है। शिक्षक के लिए सबसे बड़ा पुरस्कार उसके विद्यार्थियों की सफलता और समाज, प्रदेश तथा देश के निर्माण में उनका योगदान होता है। शिक्षकों को ज्ञान के साथ विद्यार्थियों में संस्कार, अनुशासन और सामाजिक मूल्यों का भी संचार करना चाहिए।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और स्मारिका का विमोचन
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पोर्टमोर और राजकीय कन्या महाविद्यालय शिमला की छात्राओं ने समारोह में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। राज्यपाल ने शिक्षक दिवस पर प्रकाशित विशेष स्मारिका का भी विमोचन किया। कार्यक्रम में नगर निगम शिमला के महापौर सुरेंद्र चौहान, उपमहापौर उमा कौशल, शिक्षा सचिव राकेश कंवर, राज्यपाल के सचिव संदीप भारद्वाज, प्रधान सचिव तकनीकी शिक्षा डॉ. अभिषेक जैन, स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली और उच्च शिक्षा निदेशक सुनीता सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
शिक्षकों के अनुभवों का होगा दस्तावेजीकरण
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि सम्मानित शिक्षकों की सफलता की कहानियों का दस्तावेजीकरण कर उन्हें अन्य शिक्षकों के साथ साझा किया जाएगा। बीएड और डाइस संस्थानों में भी उनके अनुभव साझा किए जाएंगे, ताकि शिक्षा समुदाय को प्रेरणा मिल सके। उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग में 9,000 से अधिक नियुक्तियां की जा चुकी हैं और आगामी एक वर्ष में कुल 15 हजार नियुक्तियां देने का लक्ष्य है। सभी सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा से अंग्रेजी माध्यम लागू किया गया है। स्थानीय भाषाओं को बढ़ावा देने के साथ विद्यार्थियों के लिए एक्सपोजर विजिट कार्यक्रम भी शुरू किया गया है।
तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि पुरस्कृत शिक्षकों ने अपने निर्धारित कर्तव्य से आगे बढ़कर विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया है। ऐसे शिक्षकों की सफलता की कहानियों का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण किया जाना चाहिए। उन्होंने विकसित भारत के निर्माण में शिक्षकों की जिम्मेदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रदेश में उत्कृष्ट और विश्वस्तरीय शिक्षण संस्थानों का विकास अगला लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए प्रदेश सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया।
इन शिक्षकों को मिला पुरस्कार
स्कूल की सामान्य श्रेणी में शशि पाल, तिलक राज, अजय कुमार, किरण कुमार, राकेश कुमार, संजय कुमार नेगी, मनोज कुमार, इंद्र प्रकाश, जगदीश कुमार, रौशन लाल, राकेश कुमार, राकेश सिंह, पूर्णिमा कुमारी, खेचोक जांगपो, चमन लाल, लोकेंद्र सिंह और सृष्टि शर्मा को पुरस्कार दिया गया। विशेष पुरस्कार श्रेणी में रोशनी देवी, सारिका आहूजा, बलवंत जोहटा, स्नेह लता, ललित कुमार और वीरेंद्र चौहान को सम्मानित किया गया। समारोह में यह भी बताया गया कि सुजानपुर की शिक्षिका मंजरी वी. महाजन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त किया है।
तकनीकी शिक्षा श्रेणी में डॉ. विवेक कुमार, डॉ. रितेश कौंडल, पोहलो राम, सुभाष चंद और रवि दत्त को पुरस्कार प्रदान किया गया। उच्च शिक्षा विभाग से डॉ. पंकज बसोतिया, डॉ. हरबंस लाल शर्मा, डॉ. समजीत सिंह ठाकुर, डॉ. प्रशांत रमन रवि और डॉ. रवि कांत को सम्मानित किया गया। समारोह में वक्ताओं ने सम्मानित शिक्षकों के कार्यों को शिक्षा समुदाय के लिए प्रेरक बताते हुए उनके अनुभवों को संस्थानों और अन्य शिक्षकों तक पहुंचाने पर जोर दिया।