छात्र मुद्दों और परीक्षा प्रणाली को लेकर कांग्रेस का कैंडल मार्च, प्रदेश अध्यक्ष ने रखी पार्टी की बात
शिमला में प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने छात्र मुद्दों से जुड़े विभिन्न विषयों को लेकर कैंडल मार्च आयोजित किया। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता, छात्र आंदोलनों से जुड़े मामलों तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर पार्टी का पक्ष रखते हुए अपनी बात रखी और इन मुद्दों पर विस्तृत प्रतिक्रिया दी।
शिमला
छात्र मुद्दों को लेकर आयोजित किया गया कैंडल मार्च
प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने छात्र मुद्दों के समर्थन में प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर कैंडल मार्च का आयोजन किया। शिमला में आयोजित मुख्य कार्यक्रम का नेतृत्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि पार्टी लगातार छात्रों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को उठा रही है और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि देशभर में लाखों छात्र विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होते हैं, ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
परीक्षा प्रणाली पर व्यक्त की चिंता
विनय कुमार ने कहा कि हाल के वर्षों में आयोजित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेषकर नीट परीक्षा से जुड़े मामलों के बाद परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठे हैं। उन्होंने कहा कि देश में हर वर्ष लगभग 20 लाख से अधिक छात्र मेडिकल और अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में शामिल होते हैं, इसलिए परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस दिशा में ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए ताकि छात्रों का भरोसा प्रणाली पर बना रहे।
छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई पर रखा पक्ष
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी छात्र आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर छात्रों के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि विभिन्न स्थानों पर हुए छात्र आंदोलनों में बड़ी संख्या में विद्यार्थी शामिल हुए, जिनमें कई जगहों पर पुलिस कार्रवाई की भी जानकारी सामने आई है। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगों पर संवाद के माध्यम से समाधान निकाला जाना चाहिए और किसी भी स्थिति में शैक्षणिक माहौल प्रभावित नहीं होना चाहिए।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया
विनय कुमार ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर कहा कि यह निर्णय देर से लिया गया कदम है। उन्होंने कहा कि परीक्षा संबंधी मामलों में जिम्मेदारी तय करते हुए संबंधित प्रकरणों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि देश में हर वर्ष करोड़ों छात्र विभिन्न परीक्षाओं में शामिल होते हैं, ऐसे में किसी भी प्रकार की अनियमितता की स्थिति में पारदर्शी जांच और कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।