शिमला स्थित केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (CPRI) ने आलू की 17 नई किस्में विकसित की हैं, जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को सहन करने में सक्षम हैं और किसानों के लिए अधिक फायदेमंद साबित हो सकती हैं। इन नई किस्मों को पिछले पांच वर्षों में अनुसंधान संस्थानों, विश्वविद्यालयों और निजी क्षेत्र के सहयोग से विकसित किया गया है।
संस्थान के निदेशक बृजेश सिंह ने बताया कि इन 17 किस्मों में से दो बायो-फोर्टिफाइड वैरायटीज – कुफरी मानिक और कुफरी नीलकंठ विशेष रूप से स्वास्थ्यवर्धक हैं, क्योंकि इनमें अधिक एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। इसके अलावा, संस्थान ने क्लाइमेट-रेसिलिएंट (जलवायु के अनुकूल) किस्मों को भी विकसित किया है, जो गर्मी सहन कर सकती हैं और कम पानी में भी अच्छी उपज देती हैं।
फ्रेंच फ्राइज़ और चिप्स इंडस्ट्री के लिए भी नई किस्में
सीपीआरआई ने प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के लिए कुफरी फ्रायोम नामक एक वैरायटी विकसित की है, जो फ्रेंच फ्राइज़ के लिए उपयुक्त है। इसके अलावा, कुफरी चिप्सोना-5 नामक एक और किस्म को चिप्स उत्पादन के लिए विकसित किया गया है। इन दोनों किस्मों को निजी कंपनियों को 19 लाइसेंस के तहत दिया जा चुका है, जिससे इनका बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा सके।
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पहाड़ी इलाकों के लिए भी खास वैरायटी
हिमाचल प्रदेश और अन्य पहाड़ी क्षेत्रों के लिए भी नई किस्में विकसित की गई हैं। कुफरी करण नामक एक विशेष वैरायटी को इन इलाकों के लिए तैयार किया गया है, जो झुलसा रोग और अन्य विषाणुजनित बीमारियों के प्रति अधिक प्रतिरोधक क्षमता रखती है।
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में लगभग 14,000 हेक्टेयर भूमि पर आलू की खेती की जाती है, जिससे करीब 2 लाख टन आलू का उत्पादन होता है। हालांकि यह उत्पादन राष्ट्रीय औसत से कम है, लेकिन इसकी गुणवत्ता और बेहतर नस्लों के कारण यह किसानों को अच्छी आय दिलाने में सक्षम है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किसानों की आय को दुगना करने के लक्ष्य के तहत केंद्रीय आलू अनुसंधान केंद्र लगातार नई वैरायटीज विकसित करने में जुटा है। इन 17 नई प्रजातियों से उम्मीद है कि किसान बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ कमा सकेंगे।
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