साइबर ठगी पर बड़ी कार्रवाई, 11,158 करोड़ की राशि बचाई, 29,837 आरोपियों की गिरफ्तारी
लोकसभा में साइबर अपराधों की रोकथाम को लेकर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में केंद्र सरकार ने इंडियन साइबर क्राइम को-ऑर्डीनेशन सेंटर (I4C) की विभिन्न उपलब्धियों की जानकारी दी। सरकार के अनुसार 30 जून 2026 तक 32.80 लाख से अधिक शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए 11,158 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी की राशि बचाई गई है।
शिमला
लोकसभा में साइबर अपराधों पर उठाया गया विषय
हिमाचल प्रदेश से भारतीय जनता पार्टी के सांसद सुरेश कश्यप ने लोकसभा में देश में बढ़ते साइबर अपराधों तथा इनके नियंत्रण के लिए स्थापित इंडियन साइबर क्राइम को-ऑर्डीनेशन सेंटर (I4C) की कार्यप्रणाली और उपलब्धियों से संबंधित प्रश्न उठाया। शिमला से जारी बयान में उन्होंने कहा कि इस प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने केंद्र सरकार द्वारा साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए किए जा रहे विभिन्न प्रयासों की जानकारी दी।
32.80 लाख शिकायतों पर कार्रवाई, 11,158 करोड़ रुपये की राशि बचाई गई
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री के अनुसार वर्ष 2021 से संचालित सीएफसीएफआरएमएस (CFCFRMS) के माध्यम से 30 जून 2026 तक 32.80 लाख से अधिक शिकायतों पर कार्रवाई की गई। इस दौरान 11,158 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी की राशि बचाई गई। उन्होंने बताया कि साइबर धोखाधड़ी की त्वरित शिकायत दर्ज कराने के लिए 1930 हेल्पलाइन भी संचालित की जा रही है, जिससे शिकायतों पर शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
सिम कार्ड, आईएमईआई और बैंक खातों पर भी हुई कार्रवाई
मंत्री ने बताया कि I4C के अंतर्गत स्थापित सीएमएमसी (CMMC) के माध्यम से बैंक, दूरसंचार कंपनियां, भुगतान एग्रीगेटर और कानून प्रवर्तन एजेंसियां समन्वित रूप से कार्य कर रही हैं। अब तक 15.75 लाख से अधिक सिम कार्ड और 5.77 लाख आईएमईआई ब्लॉक किए जा चुके हैं। वहीं सस्पेक्ट रजिस्ट्री के माध्यम से 32.08 लाख म्यूल बैंक खातों की पहचान कर 25,698 करोड़ रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन रोके गए हैं।
तकनीकी प्लेटफॉर्म से जांच और गिरफ्तारी में सहायता
सरकार के अनुसार प्रतिबिंब मॉड्यूल और अन्य तकनीकी प्लेटफॉर्म की सहायता से अब तक 29,837 साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी की गई है। इसके अलावा 2.33 लाख से अधिक साइबर जांच सहायता अनुरोधों का निस्तारण भी किया गया है। सरकार ने कहा कि साइबर अपराधों की रोकथाम और जांच को अधिक प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न तकनीकी और संस्थागत तंत्रों का उपयोग किया जा रहा है।