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हाईकोर्ट ने दूसरी पत्नी की पारिवारिक पेंशन पर फैसला सुनाया, राज्य सरकार की अपील खारिज

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 7 Hours Ago • 1 Min Read

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक पारिवारिक पेंशन विवाद में राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए दूसरी पत्नी के पेंशन दावे से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। अदालत ने कहा कि मामले के तथ्यों और लागू न्यायिक सिद्धांतों के आधार पर आर्थिक रूप से आश्रित दूसरी पत्नी को पारिवारिक पेंशन के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।

शिमला

राज्य सरकार की अपील खारिज

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंदर नेगी की खंडपीठ ने राज्य सरकार द्वारा दायर अपील को खारिज करते हुए पारिवारिक पेंशन से जुड़े मामले में अपना निर्णय सुनाया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पहली पत्नी के जीवित रहते किया गया दूसरा विवाह भले ही कानून के अनुसार वैध न माना जाए, लेकिन मामले के तथ्यों और न्यायिक सिद्धांतों के आधार पर आर्थिक रूप से आश्रित दूसरी पत्नी को पारिवारिक पेंशन के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।

उर्मिला देवी के पेंशन दावे से जुड़ा मामला

मामला उर्मिला देवी की पारिवारिक पेंशन से संबंधित है। अदालत में प्रस्तुत विवरण के अनुसार उनका विवाह 3 अप्रैल 1987 को एक सरकारी कर्मचारी के साथ हुआ था। उस समय कर्मचारी की पहली पत्नी जीवित थीं। इस विवाह से दो पुत्र हुए, जो वर्तमान में वयस्क हैं। सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उर्मिला देवी ने पारिवारिक पेंशन के लिए आवेदन किया, जिसे 18 फरवरी 2022 को पेंशन विभाग ने अस्वीकार कर दिया था।

विभाग ने नियमों का दिया था हवाला

पेंशन विभाग ने अपना निर्णय सेंट्रल सिविल सर्विसेज (पेंशन) रूल्स, 1972 के नियम 54(13) का हवाला देते हुए लिया था। इसके बाद उर्मिला देवी ने हाईकोर्ट की एकल पीठ में याचिका दायर की, जहां उनके पक्ष में फैसला दिया गया। इस निर्णय को राज्य सरकार ने खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी थी।

सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का भी किया उल्लेख

खंडपीठ ने राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई के दौरान संबंधित कानूनी प्रावधानों और पूर्व न्यायिक निर्णयों का परीक्षण किया। अदालत ने अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का भी उल्लेख किया और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर एकल पीठ के आदेश को बरकरार रखते हुए राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी।

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