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Shri Renuka Ji / अपार संभावनाओं के बावजूद पर्यटन मानचित्र पर अपनी पहचान तलाश रहा श्री रेणुकाजी

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 1 Hour Ago • 1 Min Read

Shri Renuka Ji : रामसर साइट, वेटलैंड और धार्मिक आस्था का केंद्र होने के बावजूद मूलभूत सुविधाओं का अभाव।रामसर साइट, वेटलैंड और धार्मिक आस्था का केंद्र होने के बावजूद मूलभूत सुविधाओं का अभाव

श्री रेणुकाजी

श्री रेणुकाजी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाला श्री रेणुकाजी तीर्थ क्षेत्र आज भी पर्यटन विकास के कई मानकों पर पीछे नजर आता है। रामसर साइट, वेटलैंड और वन्यजीव अभयारण्य के रूप में पहचान रखने वाला यह क्षेत्र प्राकृतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध होने के बावजूद पर्यटन की अपार संभावनाओं का पूरा लाभ नहीं उठा पाया है।

प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल श्री रेणुकाजी हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है। इसके बावजूद यहां पर्यटकों के लिए कई मूलभूत सुविधाओं का अभाव महसूस किया जाता है। झील के चारों ओर सुरक्षित परिक्रमा एवं ट्रैक का निर्माण वर्षों बाद भी पूरा नहीं हो सका है। झील में नौकायन की सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद एडवेंचर टूरिज्म, नेचर ट्रेल, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी और इको-टूरिज्म जैसी गतिविधियों को विकसित करने की दिशा में कोई ठोस पहल दिखाई नहीं देती।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस क्षेत्र को योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया जाए तो यह केवल जिला सिरमौर ही नहीं बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ प्रकृति पर्यटन, सांस्कृतिक पर्यटन और फूड टूरिज्म को बढ़ावा देने की यहां व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।

हाल ही में रेणुकाजी विकास बोर्ड द्वारा निर्मित कैंटीन भवन भी चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का मानना है कि कैंटीन के संचालन में सिरमौर के पारंपरिक व्यंजनों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इससे स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ फूड टूरिज्म का नया आयाम विकसित हो सकता है। सिरमौर की पारंपरिक खानपान संस्कृति पर्यटकों के लिए एक विशेष आकर्षण बन सकती है।

वहीं अंतरराष्ट्रीय श्री रेणुकाजी मेले को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों और पर्यटन विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व वाला यह आयोजन धीरे-धीरे केवल व्यापारिक गतिविधियों और औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित होता जा रहा है। उनका मानना है कि मेले में प्रदेश और देश के विभिन्न क्षेत्रों के देवी-देवताओं की सहभागिता, लोक संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को अधिक स्थान दिया जाना चाहिए, जिससे मेले की मूल भावना और अधिक सशक्त हो सके।

कुब्जा पवेलियन क्षेत्र में आयोजित व्यापारिक गतिविधियों के दौरान पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था न होने से भी व्यापारियों और पर्यटकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। मेले के दौरान हजारों लोगों को लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ती है, जिससे व्यापारिक गतिविधियों पर भी असर पड़ता है। पर्यटन विशेषज्ञों का सुझाव है कि मेले के लिए विस्तृत एवं सुविधाजनक स्थल विकसित किया जाए, जहां पर्याप्त पार्किंग और बड़े स्तर पर विपणन गतिविधियों की व्यवस्था संभव हो सके।

स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि मेले और अन्य आयोजनों के दौरान आम श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधाओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जाता। उनका मानना है कि यदि तीर्थ क्षेत्र में आने वाले सामान्य श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं तो यहां आने वालों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

हिमाचल पर्यटन विभाग का होटल भी इस क्षेत्र में मौजूद है, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार आधुनिक पर्यटन की आवश्यकताओं के अनुरूप सुविधाओं के विस्तार और प्रचार-प्रसार की जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि देश-विदेश के पर्यटकों को अधिक आकर्षित किया जा सके।

प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक आस्था, जैव विविधता और सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध श्री रेणुकाजी में पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। आवश्यकता केवल ऐसी दीर्घकालिक योजना की है जो पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हुए आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का विकास कर सके। यदि ऐसा संभव हो पाया तो श्री रेणुकाजी भविष्य में प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक और इको-टूरिज्म केंद्रों में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।

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