धौलाकुआं में लीची एवं आम दिवस आयोजित, किसानों को दी गई उन्नत तकनीकों की जानकारी
धौलाकुआं स्थित क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र में लीची एवं आम दिवस कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को लीची और आम की खेती से संबंधित नवीन उत्पादन तकनीकों, उन्नत किस्मों, कीट एवं रोग प्रबंधन तथा कटाई उपरांत प्रबंधन की जानकारी उपलब्ध कराना था। कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, किसानों और अन्य हितधारकों ने भाग लिया, जहां फल उत्पादन की उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई।
धौलाकुआं
धौलाकुआं केंद्र में आयोजित हुआ कार्यक्रम
डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के अधीन क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र धौलाकुआं में लीची एवं आम दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को फल उत्पादन से संबंधित नवीन तकनीकों, उन्नत किस्मों तथा कटाई उपरांत प्रबंधन की जानकारी उपलब्ध कराना था। कार्यक्रम में क्षेत्र के किसानों, वैज्ञानिकों, कृषि विशेषज्ञों तथा अन्य हितधारकों ने भाग लिया। आयोजन के दौरान फल उत्पादन से जुड़े विभिन्न तकनीकी विषयों पर जानकारी साझा की गई और किसानों को बागवानी क्षेत्र में उपलब्ध नई संभावनाओं से अवगत कराया गया।
उत्पादन तकनीकों पर किया गया विचार-विमर्श
केंद्र की सह निदेशक डॉ. प्रियंका ठाकुर ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य किसानों तक अनुसंधान आधारित तकनीकों को पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि लीची और आम जैसी फल फसलें किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं, बशर्ते वैज्ञानिक प्रबंधन पद्धतियों को अपनाया जाए। कार्यक्रम में पौध प्रबंधन, पोषण प्रबंधन, सिंचाई, गुणवत्ता सुधार तथा कटाई उपरांत प्रबंधन से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की गई, ताकि किसानों को उत्पादन और विपणन दोनों स्तरों पर लाभ मिल सके।
कुलपति ने बागवानी फसलों के महत्व पर दिया जोर
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरमिंदर सिंह बवेजा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में आम, लीची तथा सिट्रस फलों की खेती किसानों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन सकती है। उन्होंने वैज्ञानिक बाग प्रबंधन, मूल्य संवर्धन और बाजार की मांग के अनुरूप उत्पादन पर बल दिया। उन्होंने किसानों के खेतों पर सहभागी अनुसंधान परीक्षणों को बढ़ावा देने की आवश्यकता भी बताई, जिससे स्थानीय स्तर की समस्याओं का समाधान खोजने और नई तकनीकों को अपनाने में सहायता मिल सके। उन्होंने कृषि उपज मंडी समितियों तथा अन्य संस्थाओं के साथ समन्वय बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि किसानों को गुणवत्ता मानकों, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और विपणन संबंधी जानकारी समय पर उपलब्ध हो सके।
नेचर पार्क की रखी आधारशिला
कार्यक्रम के दौरान प्रो. बवेजा ने केंद्र परिसर में प्रस्तावित नेचर पार्क की आधारशिला रखी। विश्वविद्यालय के अनुसार यह पार्क जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरण शिक्षा और वैज्ञानिक अध्ययन गतिविधियों को बढ़ावा देने में सहायक होगा। इसके अलावा यह विद्यार्थियों, शोधार्थियों और स्थानीय समुदाय के लिए प्रकृति आधारित अध्ययन और जागरूकता का केंद्र भी बनेगा। पार्क के माध्यम से क्षेत्र की वनस्पति विविधता के संरक्षण और प्रदर्शन की दिशा में भी कार्य किया जाएगा।
अनुसंधान और विविधीकरण पर विशेषज्ञों ने रखे विचार
अनुसंधान निदेशक डॉ. देविना वैद्य ने राज्य में सिट्रस फलों के अनुसंधान और उत्पादन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जानकारी साझा की। उन्होंने सिट्रस बागों की उत्पादकता को प्रभावित करने वाले कारकों की पहचान और उनके समाधान के लिए व्यवस्थित अनुसंधान की आवश्यकता बताई। वहीं विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. डी.पी. शर्मा ने किसानों को उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर विविधीकरण करने की सलाह दी। उन्होंने मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग तथा बेमौसमी सब्जियों और अन्य व्यावसायिक फसलों की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर प्राप्त हो सकते हैं।
प्रगतिशील किसानों को किया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान प्रगतिशील किसान भूरा राम, जगीर चंद, निर्मल, प्रिंस और अक्षित को सम्मानित किया गया। आयोजन में वैज्ञानिकों और किसानों के बीच संवाद सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें किसानों ने फल उत्पादन से जुड़ी अपनी समस्याएं और अनुभव साझा किए। विशेषज्ञों ने उन्नत किस्मों, कीट एवं रोग प्रबंधन, कैनोपी प्रबंधन, पौध संरक्षण उपायों तथा कटाई उपरांत प्रबंधन से संबंधित तकनीकी जानकारी प्रदान की। संवाद सत्र के माध्यम से किसानों को अपनी स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वैज्ञानिक सुझाव प्राप्त करने का अवसर मिला।
