नौणी विश्वविद्यालय में बनेगा एनएमपीबी का क्षेत्रीय केंद्र, हिमाचल सहित 7 राज्यों में करेगा समन्वय
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी) ने डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी में उत्तरी क्षेत्र-1 के क्षेत्रीय-सह-सुविधा केंद्र की स्थापना को मंजूरी दी है। यह केंद्र हिमाचल प्रदेश सहित सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में औषधीय पादप बोर्ड की योजनाओं, अनुसंधान और समन्वय संबंधी गतिविधियों का संचालन करेगा।
सोलन
नौणी विश्वविद्यालय को मिला क्षेत्रीय केंद्र का दायित्व
डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी को भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अधीन कार्यरत राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी) के उत्तरी क्षेत्र-1 के क्षेत्रीय-सह-सुविधा केंद्र (Regional-cum-Facilitation Centre) की स्थापना और संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। विश्वविद्यालय का चयन देशभर से प्राप्त प्रस्तावों के मूल्यांकन और प्रतिस्पर्धी चयन प्रक्रिया के बाद किया गया। इस परियोजना के लिए विश्वविद्यालय की ओर से अनुसंधान निदेशक डॉ. देविना वैद्य के नेतृत्व में विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया गया था, जिसमें संस्थान के आधुनिक अनुसंधान ढांचे, तकनीकी विशेषज्ञता, औषधीय एवं सुगंधित पौधों पर किए गए शोध कार्यों तथा किसानों के साथ किए जा रहे विस्तार कार्यक्रमों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया। विशेषज्ञ समिति द्वारा प्रस्ताव के मूल्यांकन के बाद विश्वविद्यालय को यह जिम्मेदारी प्रदान की गई।
अनुसंधान टीम करेगी परियोजना का संचालन
क्षेत्रीय-सह-सुविधा केंद्र के संचालन के लिए विश्वविद्यालय ने परियोजना की कार्ययोजना भी तैयार कर ली है। इसमें वन उत्पाद विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. रोहित शर्मा को परियोजना का समन्वयक (Coordinator) तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. पंकज कुमार को सह-समन्वयक (Co-Coordinator) नियुक्त किया गया है। विश्वविद्यालय का प्रस्ताव नई दिल्ली में राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड की विशेषज्ञ समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया था, जहां संस्थान की अनुसंधान क्षमता, उपलब्ध वैज्ञानिक संसाधनों और तकनीकी अनुभव के आधार पर इसे स्वीकृति प्रदान की गई।
हिमाचल सहित सात राज्यों में योजनाओं का करेगा समन्वय
यह क्षेत्रीय-सह-सुविधा केंद्र पहले जोगिंद्रनगर स्थित रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन से संचालित किया जा रहा था, लेकिन अब इसका संचालन नौणी विश्वविद्यालय से होगा। यह केंद्र हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और चंडीगढ़ सहित सात राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड की योजनाओं, परियोजनाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का समन्वय करेगा। इसके माध्यम से विभिन्न सरकारी विभागों, अनुसंधान संस्थानों, किसानों, उद्यमियों और अन्य हितधारकों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जाएगा।
अनुसंधान, खेती और मूल्य संवर्धन को मिलेगा बढ़ावा
विश्वविद्यालय के अनुसार यह केंद्र औषधीय एवं सुगंधित पौधों के संरक्षण, वैज्ञानिक खेती, गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, विपणन और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए कार्य करेगा। इसके साथ ही किसानों और उद्यमियों को गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिसेज (GAP) तथा गुड फील्ड कलेक्शन प्रैक्टिस (GFCP) से संबंधित प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जाएगा। केंद्र का उद्देश्य औषधीय पौधों की वैज्ञानिक खेती को प्रोत्साहित करना, नई तकनीकों का हस्तांतरण सुनिश्चित करना तथा किसानों और उद्योगों के बीच संस्थागत समन्वय को मजबूत बनाना है, जिससे औषधीय पादप क्षेत्र के विकास को गति मिल सके।
कुलपति ने उपलब्धि पर दी जानकारी
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एच.एस. बवेजा ने कहा कि क्षेत्रीय-सह-सुविधा केंद्र के लिए नौणी विश्वविद्यालय का चयन संस्थान की अनुसंधान क्षमता, वैज्ञानिक विशेषज्ञता और औषधीय पादप क्षेत्र में किए गए कार्यों की राष्ट्रीय स्तर पर मिली मान्यता का परिणाम है। उन्होंने बताया कि यह केंद्र भविष्य में शोधकर्ताओं, किसानों, उद्यमियों, उद्योगों और सरकारी संस्थाओं के बीच तकनीकी एवं संस्थागत समन्वय को मजबूत करेगा। साथ ही औषधीय एवं सुगंधित पौधों से जुड़े अनुसंधान, नवाचार, कौशल विकास और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को भी नई दिशा प्रदान करेगा।