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नगर निकाय अध्यक्ष-उपाध्यक्ष चुनाव में विधायकों के वोटिंग अधिकार बहाल, हाईकोर्ट के आदेश पर रोक

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 2 Hours Ago • 1 Min Read

हिमाचल प्रदेश में नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष चुनाव को लेकर चल रहे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को राहत दी है। शीर्ष अदालत ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के उस अंतरिम आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें विधायकों को इन चुनावों में मतदान करने से रोका गया था। फैसले के बाद फिलहाल विधायकों के वोटिंग अधिकार बहाल हो गए हैं।

शिमला

राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के 4 जून के अंतरिम आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी। सरकार का कहना था कि संबंधित कानून के तहत विधायक स्थानीय निकायों में पदेन सदस्य होते हैं और उन्हें मतदान का अधिकार प्राप्त है। ऐसे में उन्हें अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव की प्रक्रिया से अलग नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने क्या कहा था?

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अपने अंतरिम आदेश में कहा था कि पदेन सदस्य के रूप में शामिल विधायक नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष जैसे शीर्ष पदों के चुनाव में मतदान नहीं कर सकते। अदालत ने स्पष्ट किया था कि इन पदों के लिए मतदान का अधिकार केवल निर्वाचित पार्षदों को होगा। हालांकि सामान्य बैठकों और समितियों की बैठकों में विधायकों के अधिकार यथावत रखने की बात कही गई थी।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बदली स्थिति

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए फिलहाल विधायकों के मतदान अधिकार बहाल कर दिए हैं। इस फैसले का सीधा असर नगर निकायों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के चुनाव पर पड़ेगा। अब इन चुनावों में विधायक भी मतदान प्रक्रिया का हिस्सा बन सकेंगे।

मामले में पार्षदों की ओर से भी शीर्ष अदालत में केविएट याचिका दायर की गई थी। सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद नगर निकाय चुनावों में विधायकों की भूमिका को लेकर बनी अनिश्चितता फिलहाल समाप्त हो गई है। मामले की आगामी सुनवाई में अदालत कानूनी पहलुओं पर विस्तृत विचार करेगी।