हल्दी की सुनहरी राह पर सिरमौर , नई किस्म ने जगाई किसानों में करोड़ों की उम्मीद
जिला सिरमौर में हल्दी की खेती अब किसानों की आय बढ़ाने वाली संभावनाशील फसल के रूप में उभर रही है। प्रदेश सरकार द्वारा हल्दी का समर्थन मूल्य 150 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित किए जाने के बाद किसानों का रुझान इस ओर तेजी से बढ़ा है। खासकर पहली बार जिले में प्रोत्साहित की गई राजेंद्र सोनिया किस्म की हल्दी ने किसानों के बीच नई उम्मीद पैदा की है।
नाहन
जिला सिरमौर में हल्दी की खेती अब किसानों की आय बढ़ाने वाली संभावनाशील फसल के रूप में उभर रही है। प्रदेश सरकार द्वारा हल्दी का समर्थन मूल्य 150 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित किए जाने के बाद किसानों का रुझान इस ओर तेजी से बढ़ा है। खासकर पहली बार जिले में प्रोत्साहित की गई राजेंद्र सोनिया किस्म की हल्दी ने किसानों के बीच नई उम्मीद पैदा की है।
अब तक सिरमौर के अधिकांश किसान पारंपरिक हल्दी की खेती करते रहे हैं, लेकिन कम करक्यूमिन मात्रा के कारण उन्हें बाजार में अपेक्षित मूल्य नहीं मिल पाता था। ऐसे में कृषि विभाग के आत्मा परियोजना के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाली राजेंद्र सोनिया किस्म को किसानों तक पहुंचाने की पहल की गई। पिछले वर्ष विभाग के साथ पंजीकृत प्रगतिशील किसानों को लगभग 15 क्विंटल बीज उपलब्ध करवाया गया, जिसके उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार प्रगति और राजेंद्र सोनिया जैसी उन्नत किस्मों में करक्यूमिन की मात्रा पारंपरिक हल्दी की तुलना में अधिक पाई जा रही है। प्रारंभिक स्तर पर 5 से 10 प्रतिशत तक करक्यूमिन मात्रा दर्ज की गई है। यही कारण है कि आयुर्वेदिक औषधि निर्माण और प्रसंस्करण उद्योगों में ऐसी हल्दी की मांग बेहतर मानी जा रही है।
आत्मा परियोजना सिरमौर के परियोजना निदेशक डॉ. नवदीप कौंडल ने बताया कि प्रदेशभर के किसानों से कुल 144.51 क्विंटल हल्दी की खरीद की गई है। यह खरीद केवल सिरमौर तक सीमित नहीं है। उन्होंने बताया कि खरीदी गई हल्दी का भुगतान समर्थन मूल्य के अनुसार शीघ्र ही किसानों को किया जाएगा। इसके लिए विभाग द्वारा एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें किसानों को भुगतान भी वितरित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष विभाग ने पंजीकृत किसानों को लगभग 15 क्विंटल राजेंद्र सोनिया किस्म का बीज उपलब्ध करवाया था। किसानों को इसकी अच्छी पैदावार मिली है और अब अधिक किसान इस किस्म की खेती में रुचि दिखा रहे हैं।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान पारंपरिक किस्मों के साथ-साथ उच्च करक्यूमिन वाली उन्नत किस्मों को अपनाते हैं तो आने वाले वर्षों में हल्दी सिरमौर की नकदी फसलों में महत्वपूर्ण स्थान बना सकती है। समर्थन मूल्य, बेहतर गुणवत्ता और संभावित बाजार मांग के चलते यह फसल किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
जिले में शुरू हुई यह पहल फिलहाल शुरुआती चरण में है, लेकिन इसके परिणाम संकेत दे रहे हैं कि भविष्य में सिरमौर की पहचान बागवानी के साथ-साथ गुणवत्तायुक्त हल्दी उत्पादन के लिए भी स्थापित हो सकती है।