ऊना जिले के हवलदार विशम्बर सिंह को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई, 11 वर्षीय बेटे ने दी मुखाग्नि
ऊना जिले के बंगाणा क्षेत्र में तैनात हवलदार विशम्बर सिंह का सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया, जहां उनके 11 वर्षीय बेटे ने पिता की चिता को मुखाग्नि दी। जवान का निधन देहरादून में ड्यूटी के दौरान हुआ था, जिसके बाद पार्थिव देह पैतृक गांव मलांगड़ लाई गई।
ऊना
ड्यूटी के दौरान हुआ जवान का निधन
जानकारी के अनुसार, भारतीय सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट में वर्ष 2008 में भर्ती हुए हवलदार विशम्बर सिंह देहरादून में तैनात थे। सोमवार सुबह निर्धारित शारीरिक प्रशिक्षण (पीटी) के बाद यूनिट लौटते समय उन्हें अचानक सीने में तेज दर्द की शिकायत हुई। साथी जवानों द्वारा उन्हें तत्काल आर्मी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्राथमिक जानकारी के अनुसार यह घटना ड्यूटी के दौरान हुई, जिसके बाद यूनिट स्तर पर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की गईं।
पैतृक गांव पहुंची पार्थिव देह, ग्रामीणों ने दी श्रद्धांजलि
मंगलवार को जवान की पार्थिव देह उनके पैतृक गांव मलांगड़ (बंगाणा, ऊना) पहुंची, जहां पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल रहा। तिरंगे में लिपटी पार्थिव देह के पहुंचते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, परिजन, प्रशासनिक अधिकारी और ग्रामीण अंतिम दर्शन के लिए एकत्र हुए। इस दौरान सेना और स्थानीय प्रशासन की ओर से आवश्यक प्रोटोकॉल के तहत श्रद्धांजलि दी गई तथा परिजनों ने अंतिम दर्शन किए।
परिवार पर टूटा दुख का पहाड़
हवलदार विशम्बर सिंह अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बेटे छोड़ गए हैं। बड़ा बेटा 11 वर्ष का है, जबकि छोटा बेटा लगभग 6 माह का है। जानकारी के अनुसार, परिवार में कुछ समय पहले ही छोटे बेटे के जन्म की खुशियां मनाई गई थीं, लेकिन अचानक हुई इस घटना से परिवार की स्थिति पूरी तरह बदल गई है। परिजन और स्थानीय लोग परिवार को ढांढस बंधाने में जुटे रहे।
सैन्य सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार
गांव के श्मशानघाट पर जवान का अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया। सेना की टुकड़ी ने पारंपरिक रीति के अनुसार अंतिम सलामी दी। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारी, सैन्य अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। 11 वर्षीय पुत्र अक्षित ने अपने पिता की चिता को मुखाग्नि दी, जबकि अंतिम विदाई के समय मौजूद लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
एक परिवार ने दो बेटों को खोया
जानकारी के अनुसार, यह परिवार पहले भी देश सेवा के दौरान एक बेटे को खो चुका है। अब दूसरे बेटे के निधन के बाद परिवार पर गंभीर पारिवारिक और सामाजिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया है।