Wildflower Hall / कभी लॉर्ड किचनर का आशियाना, फिर दो दशक की कानूनी लड़ाई; अब हिमाचल को करीब 2,000 करोड़ देगा वाइल्ड फ्लावर हॉल
शिमला की पहाड़ियों के बीच खड़ा प्रतिष्ठित वाइल्ड फ्लावर हॉल अब हिमाचल प्रदेश सरकार के लिए बड़े राजस्व का जरिया बनने जा रहा है। कभी ब्रिटिश भारतीय सेना के कमांडर-इन-चीफ लॉर्ड किचनर का निवास रहा यह ऐतिहासिक परिसर आग, पुनर्निर्माण, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और वर्षों तक चले विवाद का गवाह रहा है। अब होटल के संचालन एवं प्रबंधन के लाइसेंस अधिकारों की प्रतिस्पर्धात्मक ई-नीलामी पूरी होने के बाद सरकार ने 35 वर्षों में करीब 2,000 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने का अनुमान जताया है। ई-नीलामी में वार्षिक सकल राजस्व का 47.1 प्रतिशत हिस्सा सरकार को देने की बोली प्राप्त हुई है।
शिमला
कभी लॉर्ड किचनर का था आशियाना
वाइल्ड फ्लावर हॉल की पहचान केवल एक लग्जरी होटल के रूप में नहीं है। इसका इतिहास ब्रिटिश काल से जुड़ा है। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार वर्ष 1902 में यह ब्रिटिश भारतीय सेना के तत्कालीन कमांडर-इन-चीफ लॉर्ड किचनर का ग्रीष्मकालीन निवास था। आजादी के बाद यह संपत्ति राज्य के अधीन आई और बाद में हिमाचल पर्यटन के माध्यम से यहां होटल का संचालन किया गया।
शिमला से करीब 13 किलोमीटर दूर देवदार के जंगलों के बीच स्थित इस संपत्ति ने समय के साथ प्रदेश के प्रतिष्ठित पर्यटन स्थलों में अपनी जगह बनाई। लेकिन इसकी कहानी केवल विरासत और पर्यटन तक सीमित नहीं रही।
1993 की आग के बाद बदल गई पूरी तस्वीर
वाइल्ड फ्लावर हॉल की पुरानी लकड़ी की इमारत वर्ष 1993 में आग की भेंट चढ़ गई थी। इसके बाद होटल को दोबारा विकसित करने के लिए सरकार ने निजी भागीदारी का रास्ता अपनाया और 1995 में ईआईएच के साथ संयुक्त उद्यम कंपनी बनाई गई। उस समय सरकार और निजी भागीदार के बीच हिस्सेदारी की व्यवस्था तय की गई थी।
नए होटल के निर्माण और परियोजना की लागत को लेकर बाद में विवाद पैदा हुआ। इसी के साथ राज्य की हिस्सेदारी और संयुक्त उद्यम से जुड़े दूसरे मुद्दे भी विवाद का हिस्सा बने और मामला लंबे समय तक कानूनी प्रक्रियाओं में उलझा रहा।
होटल को लेकर वर्षों तक चला विवाद
वाइल्ड फ्लावर हॉल को लेकर सरकार और निजी होटल समूह के बीच विवाद इतना बढ़ा कि मामला मध्यस्थता और अदालत तक पहुंचा। वर्ष 2003 में सरकार की ओर से होटल का नियंत्रण लेने का प्रयास भी हुआ था। इसके बाद मामला मध्यस्थता में गया और 2005 में आए मध्यस्थता निर्णय को भी चुनौती दी गई।
यानी जिस संपत्ति को आज बड़े राजस्व मॉडल के तौर पर देखा जा रहा है, उसके पीछे वर्षों से चली आ रही स्वामित्व, हिस्सेदारी, निवेश और संचालन अधिकारों से जुड़ी लंबी कहानी भी है।
अब 47.1 प्रतिशत राजस्व हिस्सेदारी की रिकॉर्ड बोली
अब प्रदेश सरकार ने वाइल्ड फ्लावर हॉल होटल के संचालन एवं प्रबंधन के लिए लाइसेंस अधिकार देने की प्रतिस्पर्धात्मक ई-नीलामी पूरी कर ली है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की ओर से साझा जानकारी के अनुसार इसमें वार्षिक सकल राजस्व का 47.1 प्रतिशत हिस्सा सरकार को देने की रिकॉर्ड बोली प्राप्त हुई है।
सरकार के मुताबिक इस व्यवस्था से शुरुआती तौर पर प्रतिमाह करीब तीन करोड़ रुपये का राजस्व मिलने का अनुमान है और इसमें प्रत्येक वर्ष तीन प्रतिशत की वृद्धि होगी। पूरी 35 वर्षीय लाइसेंस अवधि के दौरान करीब 2,000 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होने का अनुमान लगाया गया है।
24 करोड़ अग्रिम फीस, कम से कम 50 करोड़ का होगा निवेश
नई व्यवस्था में केवल राजस्व हिस्सेदारी ही नहीं, बल्कि सरकार के लिए 24 करोड़ रुपये की अग्रिम लाइसेंस फीस भी सुनिश्चित की गई है। इसके अतिरिक्त होटल की संपत्ति में न्यूनतम 50 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता रखी गई है।
मुख्यमंत्री की ओर से साझा जानकारी में प्रदेश सरकार को करीब 400 करोड़ रुपये की नकद राशि प्राप्त होने की बात भी कही गई है। हालांकि उपलब्ध जानकारी में इस राशि का विस्तृत ब्रेकअप नहीं दिया गया है।
संचालन के अधिकार जाएंगे, जमीन-संपत्ति सरकार की रहेगी
इस पूरी व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पहलू वाइल्ड फ्लावर हॉल की जमीन और संपत्ति का स्वामित्व है। सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक होटल के संचालन एवं प्रबंधन के लाइसेंस अधिकार दिए जाने के बावजूद भूमि और संपत्ति पर प्रदेश सरकार का पूर्ण स्वामित्व एवं नियंत्रण सुनिश्चित हुआ है।
संयुक्त उद्यम कंपनी और उससे जुड़ी परिसंपत्तियों एवं अधिकारों पर भी सरकार का नियंत्रण सुनिश्चित होने की बात कही गई है। इस तरह नई व्यवस्था में होटल का व्यावसायिक संचालन लाइसेंस के तहत होगा, जबकि मूल संपत्ति पर सरकार का अधिकार बरकरार रहेगा।
एक ऐतिहासिक संपत्ति की कहानी अब नए दौर में
ब्रिटिश काल में लॉर्ड किचनर के निवास से लेकर होटल बनने, 1993 की आग में पुरानी इमारत गंवाने, निजी भागीदारी से पुनर्निर्माण और उसके बाद वर्षों तक चले विवाद तक वाइल्ड फ्लावर हॉल ने कई दौर देखे हैं। अब प्रतिस्पर्धात्मक ई-नीलामी के बाद यह ऐतिहासिक संपत्ति एक नए संचालन और राजस्व मॉडल की ओर बढ़ रही है।
सरकार के अनुमानों के मुताबिक आने वाले वर्षों में वाइल्ड फ्लावर हॉल से मिलने वाला राजस्व हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। ऐसे में शिमला की यह ऐतिहासिक संपत्ति अब अपनी विरासत और पर्यटन पहचान के साथ प्रदेश सरकार के लिए दीर्घकालिक राजस्व स्रोत के रूप में भी सामने आई है।