हिंडनबर्ग मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेषज्ञ कमेटी ने उद्योगपति गौतम अडानी को क्लीनचिट दे दी है। कांग्रेस ने शुक्रवार को कहा कि उच्चतम न्यायालय की विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट में जो निष्कर्ष निकाले गए हैं वे पूर्वानुमान के अनुसार हैं, लेकिन यह बात फर्जी है कि अडाणी समूह को क्लीचिट मिल गई है।
कमेटी की रिपोर्ट सार्वजिनक हुई है। रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि मौजूदा नियमों या कानूनों का प्रथम दृष्टया के स्तर पर अडानी ग्रुप की कंपनियों में किसी भी तरह से नियमों का उल्लंघन नहीं पाया गया है। अब इस रिपोर्ट पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस नेता और सांसद जयराम रमेश ने ट्वीट कर रिपोर्ट पर पार्टी की तरफ से टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस यह लगातार कहती आ रही है कि सुप्रीम कोर्ट ने जिस एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया है उसका दायरा बेहद सीमित है और वह मोदानी घोटाले के सारे पहलुओं को सामने लाने में असमर्थ (और शायद अनिच्छुक भी) होगी।
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विशेषज्ञ समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सेबी को विदेश की कंपनियों से अदाणी समूह में धन प्रवाह में कथित उल्लंघनों की अपनी जांच में कुछ गलत नहीं मिला है।
हालांकि, छह सदस्यीय पैनल ने कहा है कि यूएस-आधारित हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट से पहले अदाणी समूह के शेयरों में शॉर्ट पोजीशन बनाने के सबूत हैं और रिपोर्ट के प्रकाशन के बाद कीमतों में गिरावट के बाद शॉर्ट सेलर को लाभ हुआ।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए जयराम रमेश ने ट्विटर पर एक पोस्ट में रिपोर्ट से पांच टिप्पणियों पर प्रकाश डाला और कहा कि मोदी सरकार के दावों के विपरीत, समिति ने पाया है कि नियम अपारदर्शिता की दिशा में चले गए हैं, जो लाभकारी स्वामित्व को सुविधा प्रदान करते हैं।
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