2023 से लिमिट बनाए जाने के बावजूद स्कूलों को नहीं पहुंचता पैसा
हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग समग्र शिक्षा व स्टार प्रोजेक्ट के तहत स्कूलों को मिलने वाली ग्रांट में
बड़े झोल की आशंका जाहिर हो रही है। इस आशंका की पुष्टि जिला सिरमौर के शिक्षा खंड नौहरा, राजगढ़ और बिलासपुर की देर से स्वीकृत हुई लिमिट से होती है।
बता दे कि समग्र शिक्षा, पीएम श्री योजना तथा स्टार प्रोजेक्ट के तहत स्कूलों को वोकेशनल, स्कूल कंपोजिट ग्रांट, स्पोर्ट्स ग्रांट, कम्युनिटी ग्रांट, मोबिलाइजेशन ग्रांट, एसएमसी ग्रांट, इंटरनेट तथा बीआरसी कंटीन्जेंसीज आदि ग्रांट्स के लिए एचडीएफसी बैंक की मार्फत लिमिट जारी करने के बाद पैसा दिया जाता है।
बड़ी बात तो यह है कि ब्लॉक वाइज यह लिमिट करोड़ों में होती है। स्कूल के द्वारा प्रिंट पेमेंट एडवाइस ब्लॉक के माध्यम से बैंक को जाती है।
बैंक के द्वारा इस पीपीए पर टेक्निकल इश्यू का हवाला देकर ग्रांट रिलीज नहीं की जाती। जबकि बैंक के द्वारा ब्लॉक वाइज लिमिट 10-10 करोड़ के हिसाब से बना दी जाती है।
पीटीएफ यूनियन राजगढ़ के महासचिव जबर सिंह ने बताया कि राजगढ़ और नोहरा ब्लॉक की लिमिट नहीं बनाई गई है। इस बाबत जब एचडीएफसी बैंक के अधिकारी मनोहर कश्यप से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि बीते बुधवार को नोहराधार राजगढ़ तथा बिलासपुर शिक्षा खंडों की 10-10 करोड रुपए की लिमिट बना दी गई है। उन्होंने बताया कि टेक्निकल इशू के चलते इस कार्य में देरी हुई है।
अब सवाल यह उठता है कि संबंधित विद्यालयों के द्वारा किए गए खर्च के बाद तुरंत प्रिंट पेमेंट एडवाइस भेज दी जाती है तो पेमेंट के लिए लंबा वक्त क्यों लगाया जाता है।
जानकारी तो यह भी मिली है कि अभी-भी न केवल जिला सिरमौर बल्कि प्रदेश के कई स्कूल ऐसे हैं जिनकी ग्रांट का पैसा अभी तक होल्ड पर है। ऐसे में किसी बड़ी गड़बड़ी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
चूंकि स्कूल के बहुत से ऐसे कार्य है जिसमें इंटरनेट तथा स्पोर्ट्स ग्रांट आदि जरूरी माने जाते हैं जिनका पैसा समय पर न मिलने के कारण अध्यापकों के द्वारा अपनी जेब से पैसा लगा दिया जाता है। ऐसे मे यदि सालाना बजट के अनुसार ग्रांटका पैसा खर्चे में नहीं आता है तो वह लैप्स भी हो जाता है। बरहाल स्कूलों को एचडीएफसी बैंक के मार्फत मिलने वालीं ग्रांट अब एक उच्च स्तरीय जांच का विषय भी बन गया है।
उधर जिला सिरमौर समग्र शिक्षा जिला प्रोजेक्ट ऑफिसर रीता गुप्ता का कहना है कि हमारे 2 शिक्षा खंड की लिमिट स्वीकृत हो गई है। उन्होंने इसकी भी पुष्टि की है कि 2023 से ग्रांट में टेक्निकल इश्यू के चलते स्कूलों का पैसा अधिकतर मंजूर नहीं होता है। जिसमें बैंक की तरफ से टेक्निकल इशूका हवाला दिया जाता है। उन्होंने बताय कि जिला में अभी भी कई स्कूल ऐसे हैं जिनके खर्च की ग्रांट नहीं मिल पाई है।
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