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कफोटा में सरकारी जमीन पर कब्जे का विवाद गरमाया, राजस्व रिकॉर्ड से छेड़छाड़ के आरोप

Shailesh Saini • 51 Mins Ago • 1 Min Read

1994 से सितंबर 2026 तक हुई निशानदेहियों, जुर्माने और हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद नहीं थमा मामला; ग्रामीणों ने मांगी उच्चस्तरीय जांच, एसडीएम ने तहसीलदार कमराऊ को सौंपी जांच

हिमाचल नाऊ न्यूज़ | शिलाई

सिरमौर जिले के शिलाई विधानसभा क्षेत्र के प्रमुख केंद्र कफोटा में सरकारी भूमि पर कथित अवैध कब्जे का मामला अब राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने लगा है। करीब तीन दशक से चल रहे इस विवाद में वर्ष 1994 से लेकर सितंबर 2026 तक कई बार निशानदेही, राजस्व रिपोर्ट, जुर्माने और न्यायालय के आदेशों के बावजूद विवाद का समाधान नहीं हो पाया है।

अब 21 सितंबर 2026 को हुई ताजा निशानदेही में पहले से चिह्नित निशानों के साथ कथित छेड़छाड़ के आरोप सामने आने के बाद ग्रामीणों ने मामले की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई है।इस संबंध में ग्रामीणों जगदीश कुमार, धनीराम, सचिन, गुलाब सिंह, जगमोहन सिंह, सुरेश कुमार, नितीश, रंगीलाल, कमलेश, रतीराम, संदीप चौहान, कपिल पुंडीर, दिनेश कुमार और मुंशीराम ने एसडीएम कफोटा को शिकायत सौंपकर पूरे मामले की जांच करवाने की मांग की है।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि सरकारी भूमि, शामलात भूमि और बंदोबस्ती रास्ते से जुड़े राजस्व रिकॉर्ड तथा मौके पर किए गए चिह्नांकन की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय हो।1994 में हुई थी पहली निशानदेहीग्रामीणों के अनुसार, इस मामले में पहली निशानदेही 14 जून 1994 को तत्कालीन कानूनगो ने की थी।

उस दौरान नौ बिस्वा भूमि का ततिमा मौके पर तैयार किया गया था। शिकायत में बताया गया है कि तत्कालीन तहसीलदार देवेंद्र सिंह ने भी संबंधित स्थान को चिह्नित करते हुए दस्तावेज पर मुहर लगाई थी।इसके बाद 29 दिसंबर 2022 को तत्कालीन कानूनगो रिंकू ने दोबारा निशानदेही कर संबंधित खातेदारों के हिस्सों की पहचान की और मौके का ततिमा तैयार किया।

इसके बावजूद विवाद समाप्त नहीं हुआ और मामला आगे भी राजस्व अधिकारियों के समक्ष उठता रहा।हाईकोर्ट के आदेशों के बाद भी नहीं सुलझा विवादमामले में 30 नवंबर 2024 को उच्च न्यायालय के आदेशों के तहत तत्कालीन कानूनगो सुरेश कुमार ने निशानदेही की।

शिकायत में दिए गए विवरण के मुताबिक, इस दौरान भूमि मालिकों के हिस्सों की पहचान करने के साथ खसरा नंबर 626 की शामलात भूमि और खसरा नंबर 627 के बंदोबस्ती रास्ते को भी चिह्नित किया गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित भूमि और रास्ते पर अतिक्रमण का मामला लंबे समय से विवाद का विषय बना हुआ है।

शिकायत में वर्ष 2024 के दौरान अवैध निर्माण वाले मकान को कब्जे में लेने तथा पुलिस थाना शिलाई में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए जाने का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन कार्रवाइयों के वर्तमान क्रियान्वयन और स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

अवैध कब्जे के मामलों में 20-20 हजार रुपये जुर्माने का दावाग्रामीणों के अनुसार, तत्कालीन तहसीलदार निशा आजाद ने 5 मई 2025 को फैसला सुनाते हुए संबंधित अवैध कब्जाधारियों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। इसके बाद एसडीएम कफोटा कार्यालय ने 5 दिसंबर 2025 को दोबारा निशानदेही करवाने के लिए लिखा।

संबंधित कानूनगो ने निशानदेही के बाद 19 मार्च 2026 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।शिकायत में उपलब्ध विवरण का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि रिपोर्ट में खसरा नंबर 3664/627 पर कथित कब्जे का उल्लेख किया गया। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश सरकार की भूमि से संबंधित खसरा नंबर 4039/3662/626 पर भी अवैध कब्जा पाए जाने की बात दर्ज होने का दावा किया गया है।

इन राजस्व अभिलेखों और रिपोर्टों की जांच से ही भूमि की वास्तविक स्थिति तथा कथित कब्जे की सीमा स्पष्ट हो सकेगी।21 सितंबर की निशानदेही पर उठे सवाल, कर्मचारियों की भूमिका की जांच की मांगइस पूरे विवाद में अब सबसे नया मोड़ 21 सितंबर 2026 को हुई निशानदेही को लेकर सामने आया है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि इस दौरान पहले से चिह्नित निशानों के साथ छेड़छाड़ की गई। उन्होंने मांग की है कि संबंधित राजस्व रिकॉर्ड, पुराने ततिमों, निशानदेही रिपोर्टों और मौके की स्थिति का मिलान किसी स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच के माध्यम से करवाया जाए। साथ ही, यदि दस्तावेजों या सरकारी रिकॉर्ड में जानबूझकर बदलाव की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि मामला केवल जमीन के सीमांकन तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी संपत्ति और सार्वजनिक रास्ते से जुड़े रिकॉर्ड की विश्वसनीयता का भी सवाल है। ऐसे में पुरानी निशानदेहियों और ताजा रिपोर्ट के बीच किसी भी तरह की विसंगति को गंभीरता से जांचना जरूरी है।

एसडीएम ने दिए जांच के आदेशमामले में एसडीएम कफोटा जसपाल ने तहसीलदार कमराऊ को जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। अब जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि अलग-अलग वर्षों में हुई निशानदेहियों और राजस्व रिपोर्टों में क्या स्थिति दर्ज की गई, 21 सितंबर 2026 की कार्रवाई के दौरान वास्तव में क्या हुआ और ग्रामीणों की ओर से लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही कथित अवैध कब्जे और राजस्व रिकॉर्ड से छेड़छाड़ के आरोपों पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।