हिमाचल प्रदेश की लोक संस्कृति, परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत पर आधारित डॉ. हिमेंद्र बाली की शोधपरक पुस्तक का विमोचन शिक्षा और सांस्कृतिक जगत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि । पुस्तक का लोकार्पण शैक्षणिक समारोह के दौरान किया गया।
नाहन
वार्षिक समारोह में हुआ शोधपरक पुस्तक का लोकार्पण
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हिमाचल प्रदेश की लोक संस्कृति, इतिहास और परंपराओं पर आधारित जिला सिरमौर उच्च शिक्षा उपनिदेशक डॉ. हिमेंद्र बाली की पुस्तक “हिमाचल प्रदेश का सांस्कृतिक इतिहास” का विमोचन श्री रेणुका जी के विधायक विनय कुमार द्वारा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय रजाना के वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह के अवसर पर किया गया।
शिक्षा और प्रशासन से जुड़े गणमान्य रहे उपस्थित
पुस्तक विमोचन के अवसर पर एसडीएम संगड़ाह सुनील कायथ, उपनिदेशक निरीक्षण रीता गुप्ता, हिमाचल प्रदेश विद्यालय प्रवक्ता संघ के राज्य चेयरमैन सुरेंद्र पुंडीर, सिरमौर जिला अध्यक्ष डॉ. आई.डी. राही, दलीप वशिष्ठ तथा स्थानीय विद्यालय के कार्यकारी प्रधानाचार्य राजेंद्र झांमटा सहित अनेक शिक्षक और शिक्षाविद् उपस्थित रहे।
हिमाचल की लोक परंपराओं और इतिहास का समृद्ध दस्तावेज
डॉ. हिमेंद्र बाली की यह पुस्तक हिमाचल प्रदेश की लोक संस्कृति, वैदिक परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत का समग्र अध्ययन प्रस्तुत करती है। पुस्तक में प्रदेश में मनाए जाने वाले प्रमुख पर्व, वैदिक परंपराएं और ऐतिहासिक संदर्भों को शोधात्मक दृष्टिकोण से संकलित किया गया है।
वैदिक पर्वों और देव परंपराओं का विस्तृत वर्णन
पुस्तक में वैदिक पर्व बुढ़ी दिवाली, मंडी-सुकेत की सांस्कृतिक परंपराएं, महाशिवरात्रि पर्व, नारी जीवन, बिजली महादेव, सुकेत के सेन वंश, कोटेश्वर महादेव देवोत्सव, जमदग्नि ऋषि की तपोभूमि तत्तापानी तथा बाहरी सराज के सांस्कृतिक स्वरूप की ऐतिहासिक व्याख्या प्रस्तुत की गई है।
लोक संस्कृति और देवस्थलों की परंपराओं पर प्रकाश
पुस्तक में यह दर्शाया गया है कि हिमाचल प्रदेश की लोक संस्कृति का वैभव और देवस्थलों से जुड़ी परंपराएं प्राक्-वैदिक और वैदिक परंपराओं का संयुक्त स्वरूप हैं, जो प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को विशिष्ट बनाती हैं।
युवा पीढ़ी के लिए सांस्कृतिक मार्गदर्शिका
इस अवसर पर डॉ. हिमेंद्र बाली ने कहा कि यह पुस्तक युवा पीढ़ी को हिमाचल की संस्कृति के मौलिक स्वरूप से परिचित कराने के साथ-साथ लोक साहित्य में निहित पहाड़ी जनमानस की जीवन परंपराओं को समझने में सहायक सिद्ध होगी। उन्होंने आशा जताई कि यह कृति शोधार्थियों, विद्यार्थियों और संस्कृति प्रेमियों के लिए उपयोगी साबित होगी।
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