नाहन-पांवटा में किसका रास्ता खुला, किसका बंद?
वार्ड आरक्षण सूची आते ही बदला चुनावी खेल, कई दावेदारों का बिगड़ा गणित
हिमाचल नाऊ न्यूज़ नाहन/पांवटा साहिब :
आगामी नगर निकाय चुनावों को लेकर नाहन और पांवटा साहिब में वार्ड आरक्षण की तस्वीर साफ होते ही चुनावी माहौल गरमा गया है। शनिवार को ड्रा ऑफ लॉट्स के जरिए दोनों नगर परिषदों के वार्डों का आरक्षण तय कर दिया गया, जिसके बाद कई पुराने दावेदारों का गणित बिगड़ गया है, जबकि कई नए चेहरों के लिए राजनीति में उतरने का रास्ता खुल गया है।
सबसे ज्यादा हलचल उन वार्डों में देखी जा रही है, जहां इस बार महिला, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षण तय हुआ है। आरक्षण सूची सामने आते ही अब दोनों शहरों में चुनावी रणनीति, वार्ड स्तर की जोड़-तोड़ और संभावित उम्मीदवारों की सक्रियता अचानक बढ़ गई है।
नाहन में ऐसे बदली तस्वीर
नाहन नगर परिषद के कुल 13 वार्डों के लिए आरक्षण प्रक्रिया एसडीएम नाहन राजीव संख्यान और नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी संजय कुमार की मौजूदगी में पूरी की गई।
नाहन में वार्ड नंबर 3 शांति संगम, 4 शमशेर गंज, 5 अमरपुर, 11 जगन्नाथ मंदिर और 13 वाल्मीकि बस्ती को महिलाओं के लिए आरक्षित किया गया है।
वहीं वार्ड नंबर 9 मियां मंदिर को अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित किया गया है।
इसके अलावा वार्ड नंबर 8 रानीताल और 12 नौणी का बाग को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित रखा गया है।
जबकि वार्ड नंबर 1 ढाबों मोहल्ला, 2 हरिपुर, 6 नया बाजार, 7 अपर स्ट्रीट और 10 कच्चा टैंक को अनारक्षित रखा गया है।
पांवटा में भी कई वार्डों का समीकरण बदला
नगर परिषद पांवटा साहिब में भी 13 वार्डों के लिए आरक्षण तय कर दिया गया। यह प्रक्रिया एसडीएम द्विज गोयल की मौजूदगी में पूरी हुई।
यहां वार्ड नंबर 2, 3, 4, 6 और 12 को महिलाओं के लिए आरक्षित किया गया है।
वहीं वार्ड नंबर 10 को अनुसूचित जाति और वार्ड नंबर 11 को अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित किया गया है।
पांवटा साहिब में वार्ड नंबर 1, 5, 7, 8, 9 और 13 को अनारक्षित रखा गया है।
अब असली खेल टिकट और दावेदारी का
आरक्षण सूची सामने आने के बाद अब दोनों शहरों में वार्डवार दावेदारी का नया दौर शुरू होना तय माना जा रहा है।
जिन वार्डों में इस बार श्रेणी बदली है, वहां पहले से तैयारी कर रहे कई चेहरों को अब पीछे हटना पड़ सकता है, जबकि कुछ नए नाम अचानक मजबूत दावेदार बनकर उभर सकते हैं।
राजनीतिक तौर पर यह आरक्षण सूची सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि पूरे चुनावी समीकरण को रीसेट करने वाला दस्तावेज बन गई है। अब आने वाले दिनों में घर-घर संपर्क, गुटबाजी, समर्थन जुटाने और टिकट की अंदरूनी दौड़ और तेज होने वाली है।
यानी साफ है—
आरक्षण सूची ने नाहन और पांवटा में चुनावी बिसात बिछा दी है, अब नजर रहेगी कि कौन मैदान में उतरता है और कौन बाहर हो जाता है।